0 मानव तस्करी से जुड़ा मामला 0 अधीक्षिका की लापरवाही उजागर

0 शमी इमाम
नारायणपुर। अबूझमाड़ के नाम से प्रसिद्ध नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक के मिडिल कक्षाओं के आश्रम शालाओं में अध्ययनरत 4 आदिवासी छात्राएं 10 दिन पहले एकाएक लापता हो गई थीं। यह मामला जब प्रकाश में आया तब पुलिस ने खोजबीन की और सुराग मिलने के बाद दो टीमें बनाकर के तमिलनाडू करूर जिले में भेजी गईं। यहां इन 4 छात्राओं के अलावा अलग-अलग जिलों से गए 12 और बच्चे भी मिल गए। इस तरह कुल 16 बच्चों को ईंट भट्ठे से छुड़ाकर वापस लाया जा रहा है।

जिला जनसम्पर्क अधिकारी, नारायणपुर से मिली जानकारी के मुताबिक यहां से भेजे गए बचाव दल को तमिलनाडु के करूर में नारायणपुर के 6, कोंडागांव के 1 और बास्तानार के 9 बच्चे मिले हैं। कुल 16 बच्चों को बचाव दल द्वारा वापस लाया जा रहा है। जिसमें 12 लड़कियां और 4 लड़के शामिल हैं।

प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज रवाना हुई टीमें

PRO ने बताया कि तमिलनाडु गईं दोनों टीमों ने सभी बच्चों को समझाया और उन्हें वापस आने के लिए तैयार किया। वहां से बच्चों को वापस लाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ जरुरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी आज शाम वहां से रवाना हुए हैं। बच्चे किन परिस्थितियों में वहां गए हैं, इसका खुलासा यहां कॉउन्सिलिंग के बाद हो सकेगा।

अधीक्षक की बजाय परिजनों ने कराई रिपोर्ट

ओरछा ब्लॉक के मिडिल कक्षाओं की इन बच्चियों की उम्र 12- 14 वर्ष बताई जा रही है। हद तो ये है कि बच्चियों के लापता होने की भनक तक अधीक्षिका को नही लग पाई।
ओरछा में संचालित एकलव्य आवासीय विद्यालय की 1 छात्रा एवं आदर्श कन्या आश्रम शाला की 3 छात्राएं कुल 4 छात्राएं 13 नवम्बर को अचानक लापता हो गई थी। इन छात्राओं के लापता होने की जानकारी बाद में मिलने के बावजूद अधीक्षिका ने इसकी सूचना परिजनों को देने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

कपड़े घर पहुंचे तब हुई जानकारी

लापरवाह अधीक्षिका ने एक छात्रा के कपड़े उसके मामा के यहां छोड़ दिए और उसे भी छात्रा के कहीं चले जाने की बात नहीं बताई। इसके बाद मामा द्वारा छात्रा के कपड़े उसके घर लेकर छोड़कर भांजी के बारे जानकारी ली गई, लेकिन उसके घर नही पहुचने पर उसके लापता होने का अहसास हुआ।

बच्ची के लापता होने का पता चलने पर छात्रा की मां आशा ने अधीक्षिका से बेटी के बारे में पूछताछ की तो अधीक्षिका ने छात्रा के लापता होने की बात तो बताई, लेकिन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने से मना कर दिया ! छात्राओं के अचानक लापता होने की सूचना जब आम हुई तब परिजनों ने ओरछा थाने में पहुचकर छात्राओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

इसके बाद पुलिस भी छात्राओं की खोजबीन के लिए जुट गई। मामले की जांच और पूछताछ के आधार पर छात्राओं के तमिलनाडु जाने की सूचना पर कलेक्टर ऋतुराज रघुवंशी ने तत्काल 8 सदस्यीय दो दलों का गठन कर इन छात्राओं को ढूंढने इन दलों को रवाना किया था।

बच्चियां पहले भी जा चुकीं हैं तमिलनाडु – AC

नारायणपुर जिले के आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त (AC) संजय चंदेल ने पूछने पर पहले तो ये बताया कि लडकियां अपने घर से तमिलनाडु गईं हैं, मगर जब आश्रम अधीक्षिका की भूमिका के बारे में पूछा गया तब उन्होंने स्वीकार किया कि अधीक्षिका की भी गलती है। उन्होंने यह भी कहा कि अधीक्षिका के खिलाफ कार्यवाही अभी प्रक्रियाधीन है।

सहायक आयुक्त संजय चंदेल ने बताया कि बच्चियां पहले भी तमिलनाडु काम करने जा चुकी हैं। उन्होंने ऐसा कहकर यह बताने की कोशिश कि बच्चे यहां से काम करने के लिए परम्परागत ढंग से तमिलनाडु जाते रहे हैं।

नक्सलियों पर जताया जा रहा था संदेह

नाबालिग छात्राओं के लापता होने की खबरों के बाद लोग यह आशंका जता रहे थे कि छात्राओं को कहीं नक्सली तो अपने साथ लेकर नहीं गए। दरअसल पूर्व में नक्सली ऐसा किया करते थे। मगर यह आशंका निराधार निकली और बच्चियां तमिलनाडु में मिली।

मानव तस्करी से जुड़ा है मामला

बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला मानव तस्करी से जुड़ा हुआ है। बस्तर ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों से बड़ों और बच्चों को काम करने के नाम हर साल ले जाया जाता है। मगर जिस तरह लड़के-लड़कियों को बहला-फुसला कर गोपनीय ढंग से दूसरे राज्यों में ले जाया जा रहा है, यह काफी गंभीर मसला है। उससे भी गंभीर मामला ये है कि इस तरह की जानकारी मिलने के बावजूद प्रशासन तक इसकी सूचना नहीं दी जाती। यह तो संयोग की ही बात है कि गए थे 4 बच्चे ढूंढने, और मौके पर मिल गए कुल 16 बच्चे। कायदे से ग्रामीण इलाकों से पता लगाया जाये तो और भी खुलासे हो सकते हैं। वहीं इन बच्चों को ले जाने वाले दलालों को पकड़ कर उन पर कड़ी कार्रवाई करने की जरुरत है।

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