Chhattisgarh Agriculture News: चक्रवात अर्नब के चलते छत्तीसगढ़ में मौसम के बदलते मिजाज और बारिश की संभावना के बीच धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रदेश में धान की फसल इस समय कई जगह अहम दौर में है। धान लगभग पाक गए है। 10 से 15 दिनों बाद पूरे प्रदेश में धान की कटाई शुरू हो जाएगी। ऐसे में लगातार नमी, बारिश और खेतों में पानी जमा रहने से धान में शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट जैसे रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी. एल. शर्मा ने बताया कि बारिश के कारण होने वाली नमी से धान को नुकसान तो होगा ही साथ ही साथ चावल की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा। ऐसे में फसल की नियमित निगरानी और खेत में जमा पानी को बहार निकालने के उपाय पर ध्यान देना होगा।
बदलते मौसम में धान की फसल पर रोग का खतरा
छत्तीसगढ़ में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में बारिश, बढ़ी हुई नमी और खेतों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां फसल की सेहत पर असर डाल सकती हैं। लंबे समय तक नमी बने रहने और फसल के घने होने पर शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट जैसे रोग पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। इसलिए किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और पौधों में दिखने वाले बदलावों पर ध्यान देने की जरूरत है।
धान में शीथ ब्लाइट रोग के क्या हैं लक्षण?
शीथ ब्लाइट धान का एक प्रमुख रोग है, जो आमतौर पर पौधे के तने के आसपास पत्ती के आवरण पर धब्बों के रूप में दिखाई देता है। शुरुआत में पत्ती के आवरण पर अंडाकार या अनियमित आकार के धब्बे बन सकते हैं। अनुकूल मौसम मिलने पर ये फैल सकते हैं और पत्तियों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर खेत में पौधों के निचले हिस्से पर ऐसे धब्बे दिखाई दें, तो किसान को कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर रोग की पहचान करानी चाहिए।
ब्लास्ट रोग भी बन सकता है परेशानी
शीथ ब्लाइट के अलावा धान में ब्लास्ट रोग को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है। यह रोग पत्तियों, गांठों और पौधे के अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। अगर रोग बालियां निकलने के आसपास पौधे की गर्दन तक पहुंच जाए, तो दानों के विकास और उपज पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को केवल पत्तियों का रंग बदलने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि खेत में किसी भी असामान्य लक्षण को समय रहते पहचानने की कोशिश करनी चाहिए।
मौसम साफ होने के बाद ही करें जरूरी छिड़काव
बारिश की संभावना के दौरान खेतों में दवा का छिड़काव करने से उसका असर कम हो सकता है और खर्च भी बढ़ सकता है। छत्तीसगढ़ में मौसम आधारित कृषि सलाह के तहत किसानों को रोग या कीट के लक्षण दिखने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार करने को कहा गया है। इसलिए किसान मौसम का पूर्वानुमान देखते रहें और छिड़काव से पहले स्थानीय कृषि विभाग से सलाह जरूर लें।



