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UPI चार्ज पर वित्त मंत्री की सफाई, जानें 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर कौन देगा 0.4% शुल्क?

UPI Merchant Discount Rate: 2000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लगाने के फैसले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सफाई दी है। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया है कि यह फैसला किसी बाहरी दबाव में लिया […]

UPI चार्ज पर वित्त मंत्री की सफाई, जानें 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर कौन देगा 0.4% शुल्क?
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

UPI Merchant Discount Rate: 2000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लगाने के फैसले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सफाई दी है। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया है कि यह फैसला किसी बाहरी दबाव में लिया गया। सीतारमण ने कहा कि MDR का फैसला पेमेंट इकोसिस्टम को पेशेवर और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। उनके मुताबिक, यह सरकार की ओर से थोपा गया फैसला नहीं है, बल्कि NPCI, पेमेंट बैंक और मर्चेंट बैंक से जुड़े पक्षों की प्रक्रिया के तहत तय हुआ है।

सीतारमण ने PTI से बातचीत में कहा कि MDR कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है। इससे मिलने वाली राशि सरकार के कंसोलिडेटेड फंड में नहीं जाएगी। यह रकम UPI पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।

किसे मिलेगा MDR का पैसा?

नई व्यवस्था के तहत MDR से मिलने वाली राशि को UPI इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा। दिए गए ढांचे के मुताबिक 40 प्रतिशत हिस्सा ग्राहक के बैंक, 30 प्रतिशत पेमेंट गेटवे, 20 प्रतिशत UPI ऐप और 10 प्रतिशत संबंधित UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा। UPI पर नया MDR 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। इसका भुगतान मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी करेगा, ग्राहक नहीं। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। व्यक्ति से व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई MDR नहीं लगेगा। 2000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

रेलवे, फ्यूल और इंश्योरेंस के लिए अलग शुल्क

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए 0.4 प्रतिशत की जगह अलग फ्लैट MDR तय किया गया है। रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट शुल्क लागू होगा। कैपिटल मार्केट से जुड़े लेनदेन, जैसे म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकिंग, के लिए 0.02 प्रतिशत की दर रखी गई है। इस पर भी अधिकतम 300 रुपये की सीमा होगी।

छोटे कारोबारियों को राहत

नए MDR ढांचे में छोटे कारोबारियों को अलग राहत दी गई है। UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान लेने वाले छोटे मर्चेंट नए MDR से मुक्त रहेंगे। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए UPI को बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध रखना है।

15 सितंबर को NPCI ने जारी किया था सर्कुलर

NPCI ने 15 सितंबर को संशोधित UPI MDR ढांचा जारी किया था। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी। सरकार और NPCI के मुताबिक इसका उद्देश्य UPI पेमेंट इकोसिस्टम के लिए लंबे समय में टिकाऊ राजस्व ढांचा तैयार करना है। नए ढांचे में छोटे मर्चेंट के बीच UPI की पहुंच बढ़ाने के लिए एक फंड का भी प्रावधान है। इसमें MDR से जुटाई गई राशि का एक हिस्सा रखा जाएगा। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता और इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि इस मुद्दे को बिना पूरी व्यवस्था समझे देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि MDR सरकार की ओर से वसूला जाने वाला कर नहीं है और इसका पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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