UPI MDR Rules: देशभर के डिजिटल पेमेंट यूजर्स और व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने आने वाले त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज के फैसले को फिलहाल टाल दिया है।
यह चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था, जिसके तहत 2,000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर दुकानदारों से 0.4% का शुल्क लिया जाना था। अब यह नई व्यवस्था दिवाली के तुरंत बाद लागू की जाएगी, हालांकि इसके लिए कोई पक्की तारीख अभी तय नहीं की गई है।
क्या है यूपीआई पर एमडीआर चार्ज का मामला?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो कुछ डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं में दुकानदार या व्यापारी को लेनदेन स्वीकार करने के बदले चुकाना पड़ सकता है। यदि यूपीआई भुगतान पर ऐसा शुल्क लागू होता है, तो इसका असर व्यापारियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। इसलिए एमडीआर की समयसीमा को लेकर किसी भी बदलाव पर व्यापारियों की नजर रहती है।
छोटे व्यापारियों को क्यों है राहत की उम्मीद?
किराना दुकानों, छोटे कारोबारियों और अन्य व्यापारियों के बीच यूपीआई भुगतान लोकप्रिय है। इसकी मदद से ग्राहक नकदी के बिना आसानी से भुगतान कर सकते हैं। यदि व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है, तो उनके लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना अपेक्षाकृत आसान रहता है। एमडीआर की समयसीमा बढ़ने की खबर से ऐसे कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या यूपीआई भुगतान पर अभी कोई अतिरिक्त शुल्क लगेगा?
यूपीआई के सामान्य बैंक-खाते से बैंक-खाते में होने वाले भुगतान पर फिलहाल शून्य एमडीआर व्यवस्था लागू है। इसलिए 15 अक्टूबर से सभी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगने का दावा आधिकारिक पुष्टि के बिना नहीं किया जाना चाहिए। व्यापारी भुगतान के प्रकार, संबंधित सेवा और लागू नियमों के आधार पर शुल्क की जानकारी अपने भुगतान सेवा प्रदाता से प्राप्त कर सकते हैं।
1 जनवरी 2027 की तारीख पर क्या ध्यान देना जरूरी है?
एमडीआर की समयसीमा 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किए जाने की जानकारी अभी आधिकारिक अधिसूचना से सत्यापित की जानी चाहिए। किसी सरकारी आदेश या नियामकीय घोषणा के बिना यह दावा करना उचित नहीं होगा कि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। व्यापारियों को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
डिजिटल भुगतान करने वालों पर क्या होगा असर?
यूपीआई ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है। यदि भविष्य में किसी विशेष श्रेणी के लेनदेन पर शुल्क संबंधी बदलाव होता है, तो उसका असर व्यापारियों की लागत और भुगतान सेवाओं की शर्तों पर पड़ सकता है। हालांकि, आम ग्राहकों के बैंक-खाते से किए जाने वाले सामान्य यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने का निष्कर्ष इस खबर से नहीं निकाला जा सकता।



