जैविक खेती की ओर छत्तीसगढ़

उचित शर्मा

छत्तीसगढ़ के लोक महापर्व हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सांकेतिक रूप से गोबर खरीद कर जिस गोधन न्याय योजना की शुरुआत की है उसके दूरगामी मायने हैं। सही अर्थों में कहा जाए तो इसके पीछे सीएम भूपेश बघेल की योजना छत्तीसगढ़ के गांव.खलियान तक जैविक खेती को जन आंदोलन बना कर इससे प्रदेश के अन्नदाता किसानों को समृद्ध करने की उनकी इच्छा शक्ति ही है। इस बार उनका साथ देने आई उनकी धर्मपत्नी मुक्तेश्वरी बघेल और परिवार के सदस्य, सभी ने मिलकर गोधन तथा कृषि यंत्रों की पूजा-अर्चना कर पुरखों के इस सपनों को पंख लगा दिए। ये सपना भले ही भूपेश बघेल के आंखों में पल रहा है पर इसे परवान चढ़ाने में डॉ. खूबचंद बघेल, पं. सुंदरलाल शर्मा जैसे छत्तीसगढ़ के पुरोधाओं ने सालों पहले देखा था जो अब पूरा होता नजर आ रहा है।

आज सीएम जब आरंग में गौठान से इस योजना की शुरुआत की तो मीडिया के सामाने अपने विचारों को रखा। मीडिया से मुखातिब होते हुए बघेल ने जो कहा उसमें उनका विजन साफ तौर सामने आया।

बकौल सीएम….

”इस योजना का उद्देश्य पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ-साथ कृषि लागत में कमी और भूमि की उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी है। इस योजना से पर्यावरण में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बड़े बदलाव की उम्मीद है। गोधन न्याय योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा। यह योजना संकट के समय किसानों और पशुपालकों के लिए वरदान साबित होगी। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संजीवनी बनेगी। यह एक बहुआयामी योजना है, जिससे हमें बहुत सारे लक्ष्य एक साथ हासिल करेंगे। इस योजना से पशुपालकों की आय में वृद्धि तो होगी ही, पशुधन की खुली चराई पर भी रोक लगेगी। जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलने से रासायनिक खाद के उपयोग में कमी आएगी। किसानों के जैविक उत्पाद बाजार में 15 प्रतिशत अधिक कीमत पर बिकेंगे, जिससे अतिरिक्त आय होने से उनकी हालत सुधरेगी। साथ ही खरीफ तथा रबी फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होने से द्विफसलीय क्षेत्र में इजाफा होगा। भूमि की उर्वरता में सुधार तो होगा ही साथ ही विष रहित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ेगी, इससे पोषण का स्तर और सुधरेगा।”

आत्म निर्भर होंगे गांव, रोजगार भी मिलेगा

छत्तीसगढ़ में जब 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनी तो सबसे पहले मुख्यमंत्री ने गांव और किसानों की ही चिंता की। किसानों की कर्ज माफी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना और अब गोधन न्याय योजना.. भूपेश सरकार की फ्लै​गशिप योजना है। सीधे तौर पर कहे तो गांव, किसान और ग्रामीण परिवेश में रोजगार के अवसर की कल्पना गांधीवादी चिंतन में बसा है, और भूपेश बघेल ने उसी गांधीवादी ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के पैरोकार बनकर देश व अन्य प्रदेशों के सामने एक नई अर्थ व्यवस्था का खाका रखा है जिसमें किसानों की माली हालत सुधारने उन्हें जैविक खेती के साथ उन्नत ​कृषि प्रशिक्षण देने की योजना है। इस योजना में किसान के रसायनिक खादों पर होने वाले अनावश्यक खर्च की बचत तो होगी ही साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उपाए भी होंगे।

इस योजना के तहत सरकार पशुपालकों से 2 रुपए किलो की दर से गोबर खरीदेगी और फिर महिला स्व.सहायता समूह उससे वर्मी जैविक खाद तैयार करेंगी। जिसे सरकार की सहकारी समिति 8 रुपए किलो की दर से खरीद कर किसानों में उसका वितरण करेगी। सहकार की भावना पर आधारित सरकार की ये योजना निश्चित तौर छत्तीसगढ़ के गांवों की तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।

फिलहाल लोक महापर्व हरेली के अवसर शुरू की गई यह योजना छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए सुखद संदेश लेकर आई है। उम्मीद है कि इस काम में टीम भूपेश के अलावा प्रदेश के अफसर भी कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।

…..जय जोहार, जय छत्तीसगढ़।

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