Bastar Dhokra Craft: छत्तीसगढ़ के बस्तर की प्राचीन और सुप्रसिद्ध पारंपरिक ढोकरा (बेलमेटल) कला को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई व सशक्त पहचान मिलने जा रही है।
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा देश भर के ट्राइबल आर्टिजन क्लस्टरों को प्रीमियम क्लस्टर के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है, जिसके तहत बस्तर के ढोकरा क्लस्टर का चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
केंद्रीय टीम ने किया चिलकुटी का दौरा
इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के समन्वय से जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय टीम ने बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम चिलकुटी का प्रत्यक्ष दौरा किया। टीम ने जमीनी स्तर पर पहुंचकर यहां की संभावनाओं का बारीकी से जायजा लिया और स्थानीय स्तर पर हो रहे कार्यों की समीक्षा की।
विशेषज्ञों ने समझी बारिकियां
इस केंद्रीय दल का नेतृत्व मंत्रालय के अवर सचिव डॉ. सुधीर कुमार कर रहे थे। उनके साथ इस दौरे में प्रोजेक्ट एसोसिएट व सलाहकार नौरिन शाहिद और क्लस्टर डेवलपमेंट एक्सपर्ट जागेश्वर भी विशेष रूप से शामिल रहे। अधिकारियों के इस दल ने स्थानीय शिल्पकारों से मुलाकात कर कला से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
शिल्पकारों से सीधी चर्चा
आदिवासी विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त समन्वय से आयोजित इस भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय आदिवासी शिल्पकार परिवारों से संवाद किया। दल ने मोम से बारीक सांचे बनाने, मिट्टी का लेप चढ़ाने और फिर धातु ढलाई की जटिल एवं पारंपरिक प्रक्रिया को बेहद नजदीक से देखा और उसकी सराहना की। साथ ही वन विभाग द्वारा कारीगरों के लिए तैयार सामुदायिक भवन की गतिविधियों को भी परखा गया।
चिलकुटी बनेगा समग्र मॉडल प्रीमियम क्लस्टर
मंत्रालय की मुख्य मंशा ग्राम चिलकुटी को एक समग्र मॉडल प्रीमियम क्लस्टर के रूप में स्थापित करने की है। इसके तहत एक सुनियोजित एक वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत एक ही एकीकृत परिसर में अत्याधुनिक ढोकरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, मटेरियल स्टोर और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग में होगा सुधार
इस महत्वाकांक्षी क्लस्टर विकास योजना के जरिए न केवल पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा, बल्कि आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप उनकी ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। इससे देश-विदेश के ग्राहकों तक बस्तर की यह अनूठी कला आसानी से पहुंच सकेगी और कारीगरों को बेहतर मुनाफा मिल सकेगा।
बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन बनेगा मार्केटिंग हब
योजना के अगले चरण में बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन को एक सशक्त मार्केटिंग हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इससे पारंपरिक शिल्पकारों को सीधे तौर पर राष्ट्रीय बाजारों और बड़े खरीदारों से जोड़ा जा सकेगा, जिससे बस्तर के ढोकरा कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त होगा।



