Bastar Flood Crisis: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हालिया भारी बारिश और बाढ़ के कारण मची तबाही को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बस्तर के अधिकांश हिस्से बाढ़ और बारिश से तबाह हो चुके हैं।
संभाग के 571 गांव पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं और 22 हजार से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं, जबकि 8 लोगों की मौत भी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार की ओर से कोई ठोस राहत और बचाव कार्य नहीं दिखा, और मुख्यमंत्री का एक दिवसीय बस्तर-सुकमा दौरा सिर्फ एक राजनीतिक खानापूर्ति बनकर रह गया।
10 हजार की सहायता राशि पर सवाल
दीपक बैज ने मुख्यमंत्री द्वारा बाढ़ प्रभावित परिवारों को 10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतना कार्य तो स्थानीय स्तर पर एसडीएम और तहसीलदार भी कर सकते थे। बस्तरवासियों को मुख्यमंत्री से किसी ठोस और बड़े ऐलान की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार प्रभावितों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करे। साथ ही याद दिलाया कि पिछले साल 2025 की बाढ़ में टूटे पुल-पुलिया और सड़कें आज तक नहीं बन पाई हैं, और मुख्यमंत्री हर साल सिर्फ फोटो खिंचवाने बस्तर आते हैं।
जलजनित बीमारियों का मंडराता खतरा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही के कारण अब आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बारिश के बाद डेंगी, मलेरिया और डायरिया जैसी जलजनित महामारियों के फैलने की पूरी आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की बेरुखी के कारण बस्तर से लेकर सरगुजा तक जनता पानी में डूबी है और सरकार आराम फरमा रही है। स्थानीय नागरिकों की गाढ़ी कमाई के टैक्स का पैसा वसूलने के बावजूद उन्हें नारकीय जीवन जीने के लिए छोड़ दिया गया है, जबकि मंत्री केवल समीक्षा बैठकों की तस्वीरें खिंचवाने में व्यस्त हैं।
स्मार्ट सिटी पर सरकार से पूछे तीखे सवाल
दीपक बैज ने सरकार से कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि मानसून से पहले प्रदेश के निकायों में नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का जो बजट जारी हुआ था, वह जमीन पर कहां खर्च हुआ? रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों में ‘स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत जल निकासी सुधारने के नाम पर पानी की तरह बहाया गया पैसा आखिर किस नाली में चला गया? उन्होंने कहा कि मानसून पूर्व की तैयारियों में भारी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही बरती गई है, जिसके चलते जरा सी बारिश में ही प्रमुख शहर टापू बन गए और लोगों के घरों में पानी घुस गया।
तत्काल मुआवजे की उठी मांग
वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दीपक बैज ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मानसून से पहले व्यापक सफाई अभियान चलाए जाते थे, 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय रहते थे और जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों में तुरंत पंपिंग सिस्टम से पानी की निकासी सुनिश्चित की जाती थी। इसके विपरीत, आज भाजपा सरकार के राज में नाले पूरी तरह जाम हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। कांग्रेस ने मांग की है कि जिन गरीबों, छोटे व्यापारियों और नागरिकों के घरों में पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
- बस्तर संभाग में बाढ़ और बारिश से संभाग के 571 गांव बाढ़ से पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और 22 हजार से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं।
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री के बस्तर दौरे को महज एक ‘खानापूर्ति’ करार दिया है।
- कांग्रेस ने सरकार से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत पैकेज और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों व सड़कों के पुनर्निर्माण की मांग की है।
- बारिश और जलभराव के बाद डेंगी, मलेरिया और डायरिया जैसी जलजनित महामारियों का खतरा बढ़ गया है।
- कांग्रेस ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर आरोप लगाया है कि जल निकासी सुधारने के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए और शहर टापू बन गए।



