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Bilaspur: सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल की मंजूरी अनिवार्य, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

CG High Court significant verdict: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस बीडी गुरु ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल की पूर्वानुमति अनिवार्य है, केवल मुख्यमंत्री की स्वीकृति से […]

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तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

CG High Court significant verdict: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस बीडी गुरु ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल की पूर्वानुमति अनिवार्य है, केवल मुख्यमंत्री की स्वीकृति से कार्रवाई शुरू नहीं हो सकती।

याचिकाकर्ता रियाजुल बारी ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा में चार दशक से अधिक सेवा के बाद 30 जून 2023 को मुख्य अभियंता पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति से ठीक पहले 22 मई 2023 को विभाग ने उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दिया था, जिसमें कोई जांच लंबित नहीं थी। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण में संविदा पर नियुक्त किया गया। इसी दौरान PMGSY के तहत सड़कों के रखरखाव की राशि में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया और सरकार ने सेवानिवृत्ति के लगभग 3 साल बाद 21 अप्रैल 2026 को आरोप पत्र जारी किया।

पेंशन नियमों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस बीडी गुरु की पीठ ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 9 का परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि नियम में स्पष्ट रूप से राज्यपाल की मंजूरी का प्रावधान है। राज्य सरकार कोई ऐसा संशोधित कानून पेश नहीं कर सकी जो राज्यपाल के स्थान पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति को मान्य करे। कोर्ट ने कहा – “कोई परिपत्र या कार्यालयीन व्यवस्था मूल वैधानिक नियम को नहीं बदल सकती। जब कानून एक निश्चित तरीका तय करता है, तो शासन को उसी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करना होगा।”

दोनों पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने तर्क दिया कि नियम 9 के तहत राज्यपाल की स्वीकृति जरूरी है, जिसका उल्लंघन हुआ है। वहीं राज्य सरकार ने 2 मार्च 2017 के शासकीय परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में समन्वय विभाग के जरिए मुख्यमंत्री की मंजूरी ली जाती है और 25 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी थी। हाईकोर्ट ने सरकार के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने आरोप पत्र किया निरस्त

हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 का आरोप पत्र और पूरी विभागीय कार्रवाई को निरस्त कर दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार पेंशन नियमों में निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी करती है तो नए सिरे से कार्रवाई कर सकती है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लेकर क्या फैसला दिया?
Ans. हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन नियम 1976 के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल की पूर्वानुमति अनिवार्य है, सिर्फ मुख्यमंत्री की मंजूरी से कार्रवाई शुरू नहीं हो सकती।

Q2. यह मामला किससे जुड़ा था?
Ans. यह मामला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता रियाजुल बारी से जुड़ा था, जो 30 जून 2023 को रिटायर हुए थे और उन पर PMGSY में वित्तीय अनियमितता का आरोप था।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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