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आत्मानंद स्कूलों में भर्ती के लिए जारी विज्ञापन को चुनौती, हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया, पढ़िए इस खबर में

sejes school high court verdict
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों (SAGES) में 1,812 संविदा पदों की भर्ती के लिए DPI द्वारा 29 सितंबर 2026 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई।
  • आधा दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
  • मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई।
  • छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता गोविंद देवांगन के माध्यम से याचिका दायर की थी।

बिलासपुर। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों (SAGES) में 1,812 संविदा पदों की भर्ती के लिए DPI द्वारा 29 सितंबर 2026 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई। आधा दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई।

छत्तीसगढ़ के आधा दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता गोविंद देवांगन के माध्यम से याचिका दायर की थी। तर्क था कि विज्ञापन के क्लॉज-8 में शर्त रखी गई है कि आवेदक को कक्षा 6वीं से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से उत्तीर्ण होना चाहिए, सिवाय हिंदी और संस्कृत विषयों के। याचिकाकर्ताओं ने कहा यह शर्त छत्तीसगढ़ विद्यालय शिक्षा सेवा भर्ती नियम 2026, संविदा नियम 2012 और NCTE नियमों में नहीं है, और यह हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 का उल्लंघन है। नया विज्ञापन जारी कर हिंदी माध्यम वालों को भी मौका देने की मांग की थी।

सरकार का पक्ष – एडिशनल AG वायएस ठाकुर ने क्या कहा?

राज्य शासन ने कहा – SAGES अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हैं, तो अंग्रेजी में पढ़ाने की क्षमता जरूरी है। विज्ञापन में साफ लिखा है कि हिंदी और संस्कृत के शिक्षकों को इस शर्त से छूट है। भर्ती नियमों में हर बारीक शर्त का उल्लेख होना जरूरी नहीं, नियोक्ता को पद की जरूरत के हिसाब से शर्त तय करने का अधिकार है। यह शर्त न तो मनमानी है न भेदभावपूर्ण।

कोर्ट ने क्या कहा – 5 बड़ी बातें

  1. नियोक्ता ही योग्यता तय करेगा: कोर्ट ने कहा यह स्थापित सिद्धांत है कि नियोक्ता पद की प्रकृति को देखकर न्यूनतम योग्यता तय करने में सक्षम है, बशर्ते वह उचित हो और किसी कानून का उल्लंघन न करे।
  2. कोर्ट भर्ती प्राधिकारी नहीं बन सकता: योग्यता तय करना भर्ती नीति का विषय है। कोर्ट न्यायिक समीक्षा के नाम पर नियुक्ति प्राधिकारी की कुर्सी पर बैठकर फैसला नहीं ले सकता।
  3. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला: कोर्ट ने कहा – अतिरिक्त योग्यता, वरीयता और समतुल्यता जैसे प्रश्न न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। यदि विज्ञापन स्पष्ट है तो कोर्ट उसकी व्याख्या नहीं बदल सकता।
  4. अंग्रेजी माध्यम की शर्त मनमानी नहीं: SAGES की प्रकृति अंग्रेजी माध्यम है, इसलिए 6वीं से PG तक अंग्रेजी माध्यम की शर्त का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक उसी माध्यम में प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।
  5. हिंदी माध्यम वालों का तर्क खारिज: सिर्फ इसलिए कि राज्य में हिंदी माध्यम के छात्र ज्यादा हैं, यह अनुच्छेद 14, 15, 16 का उल्लंघन नहीं बन जाता। पात्रता की वैधता उसके उद्देश्य और तर्कसंगतता से तय होगी।

अंतिम फैसला: कोर्ट ने कहा – विवादित विज्ञापन में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिलता, याचिका खारिज की जाती है।

कौन थे याचिकाकर्ता?

तरुण कुमार वैष्णव (राजनांदगांव), संतोष साहू (बालको), बरखा सोनी (रायपुर), मनीष सेतिया (दंतेवाड़ा), मंगलेश्वर (कोरिया), तेजस्विनी साहू, नम्रता साहू (रायपुर), अरुण पटेल (सारंगढ़) और संजय कुमार (जांजगीर-चांपा)।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  1. आत्मानंद स्कूल भर्ती में कितने पद हैं?
    SAGES में 1,812 संविदात्मक पदों के लिए 29 सितंबर 2026 को विज्ञापन जारी हुआ था।
  2. हाई कोर्ट में चुनौती क्या थी?
    अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की अनिवार्य शर्त को भेदभावपूर्ण और अवैध बताया गया था।
  3. हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
    जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने याचिका खारिज कर दी और विज्ञापन की शर्त को बरकरार रखा।
  4. हिंदी और संस्कृत शिक्षकों के लिए क्या छूट है?
    उनके लिए कक्षा 6 से PG तक अंग्रेजी माध्यम की शर्त अनिवार्य नहीं है।
  5. कोर्ट की सबसे बड़ी टिप्पणी क्या थी?
    नियोक्ता पद की जरूरत के हिसाब से योग्यता तय कर सकता है, कोर्ट उसकी जगह लेकर फैसला नहीं कर सकता।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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