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Breaking News: TRP की मुहिम रंग लाई, पेपर घोटाले पर लगाम, सरकार ने बचाए 50 करोड़ रुपए

Breaking News: TRP की मुहिम रंग लाई, पेपर घोटाले पर लगाम, सरकार ने बचाए 50 करोड़ रुपए
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार पर एक और कड़ा प्रहार किया है। वर्षों से पाठ्य पुस्तक निगम में चल रहे कागज़ ख़रीदी घोटाले को उजागर करने में टीआरपी ने निर्णायक भूमिका निभाई है। इसकी बदौलत प्रदेश सरकार ने इस साल करीब 50 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि बचाने में सफलता हासिल की है।

टीआरपी ने पिछले कई सालों से पाठ्य सामग्री की खरीद में अनियमितताओं और बढ़े हुए रेट्स के खिलाफ लगातार मामले प्रकाशित किए। मामला सीएम सचिवालय के मुखिया सुबोध कुमार सिंह संज्ञान में लाया गया। इन रिपोर्ट्स को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए ठोस कदम उठाया। इस बार पेपर की खरीदी प्रक्रिया को कड़ी निगरानी व निर्देश में पूरी पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया गया।

पुरानी सरकार में हुई थी महंगी खरीदी

  • इससे पूर्व पाठ्य पुस्तक निगम ने 10,000 टन पेपर की खरीदी 113 रुपये प्रति किलो की थी।
  • 12% GST जुड़कर 10000 टन के पेपर्स 125 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी की गई।
  • वहीं वर्तमान सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी प्रक्रिया से 10000 टन पेपर इस साल सिर्फ 78 रुपये प्रति किलो (GST सहित) दर पर खरीदा गया। जिससे सरकार को करीब 50 करोड़ रुपए का फायदा

जब टीआरपी ने अन्य राज्यों की पड़ताल की तब जानकारी प्राप्त हुई कि छत्तीसगढ़ की यह नई दर पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की तुलना में भी काफ़ी कम है, जहां वर्तमान में पेपर की दर 102 रुपये प्रति किलो है।

आपको बता दें कि हर वर्ष की भांति इस साल भी 2025-26 के लिए विभाग ने स्कूली बच्चों के पुस्तकों की छपाई के लिए करीब 10000 टन कागज खरीदी की निविदा Gem Portal में निकाली थी। बता दें कि पिछले वर्ष 125 करोड़ की खरीदी की गई थी। छपाई के बाद इन कितबों का वितरण हर साल विभाग स्कूली बच्चों को करता है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और टीबीसी के एमडी संजीव झा ने मिलकर एक कार्य योजना तैयार की और निष्पक्ष निविदा प्रक्रिया के जरिए पेपर की खरीदी की। जिससे शासन को लगभग 50 करोड़ रुपए का फायदा हुआ।

भ्रष्टाचार पर टीआरपी की मुहिम लायी रंग

टीआरपी ने पहले भी पूर्व सरकार में इस मामले को बार-बार उठाया था। तत्कालीन शिक्षा सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ( पूर्व मुख्य सचिव शिक्षा) को भी इस घोटाले की जानकारी थी, लेकिन उनके स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। टीआरपी समय समय पर जनसरोकार के मुद्दों को बड़ी ही बेबाकी से उठाता है। प्रदेश सरकार ने इस साल करीब 50 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि बचाने में सफलता हासिल की है।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता

The Rural Press के लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग।

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