धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ के हाथी प्रभावित इलाकों में एक बार फिर शिकारियों की खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ है। यहां लैलूंगा के जंगल में हाथियों के लिए मौत का जाल बिछाया गया था, लेकिन वन विभाग की सतर्कता और एक हाथी की चिंघाड़ ने पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया।
यह पूरी कार्रवाई वन मंडलाधिकारी सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन और लैलूंगा वन परिक्षेत्र अधिकारी ए.एस. किंडो के नेतृत्व में ट्रैकिंग टीम ने की।
जंगल में डेरा डाले हैं हाथियों का दल
वन विभाग के अनुसार, 18 सितंबर 2026 से लैलूंगा परिक्षेत्र में हाथियों का एक बड़ा दल विचरण कर रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने के लिए विभाग ने सरपंचों को अलर्ट किया था, कोटवारों से मुनादी कराई गई थी और ग्रामीणों को जंगल से दूर रहने की अपील की गई थी। इसी निगरानी के दौरान शिकार की साजिश पकड़ में आई।
आधी रात को चिंघाड़ और आग की लपटों से हुए सतर्क
19 सितंबर की रात करीब 12 बजे कक्ष क्रमांक 302 PF में हाथियों का दल घूम रहा था। तभी अचानक एक हाथी बिछाए गए विद्युत तार के संपर्क में आ गया।
तार में करंट था। संपर्क में आते ही तेज चिंगारी और आग की लपटें उठीं और साथ ही हाथी की जोरदार चिंघाड़ जंगल में गूंज उठी। हाथी तो आगे निकल गया, लेकिन वन अमले को समझ आ गया कि यहां कुछ गड़बड़ है।
टीम ने तुरंत मौके का निरीक्षण किया तो होश उड़ गए। वहां बांस की खूंटियों के सहारे GI तार बिछाकर उसमें करंट प्रवाहित करने की पूरी व्यवस्था की गई थी। मौके पर कांच की शीशियों का इस्तेमाल भी किया गया था ताकि करंट का पता न चले।

रातभर जंगल में घेराबंदी, सुबह 3 बजे जाल समेटने आए शिकारी
वन विभाग ने तुरंत इलाके को घेर लिया। कर्मचारी और ट्रैकर्स रातभर झाड़ियों में छिपकर निगरानी करते रहे। और आखिरकार सुबह करीब 3 बजे चार लोग तार निकालने मौके पर पहुंचे। वन अमले ने घेराबंदी कर दो को मौके पर ही दबोच लिया, दो भाग निकले। बाद में लगातार सर्चिंग और पूछताछ के बाद फरार दो आरोपियों को भी पकड़ लिया गया।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जेल भेजे गए
पूछताछ में आरोपियों ने शिकार के लिए तार बिछाना कबूल किया। वन विभाग ने प्रकरण क्रमांक 20290/16, दिनांक 20.09.2026 दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की। सभी को न्यायालय में पेश कर जेल दाखिल कराया गया है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
सभी आरोपी ग्राम भकुर्रा के निवासी हैं —
1. सुशील पिता नानसाय लोहार, उम्र 40 वर्ष
2. शील सागर पिता मुटून कलंगा, उम्र 42 वर्ष
3. करमसिंह पिता बनाऊ कलंगा, उम्र 25 वर्ष
4. धोबा पिता लुकेश्वर कलंगा, उम्र 60 वर्ष
वन विभाग की अपील
लैलूंगा क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए गश्त बढ़ा दी गई है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों वाले क्षेत्र में अकेले न जाएं, हाथियों को परेशान न करें और कहीं भी संदिग्ध तार या शिकार की गतिविधि दिखे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. लैलूंगा जंगल में हाथियों के लिए करंट का जाल किसने और क्यों बिछाया था?
— धरमजयगढ़ वन मंडल के लैलूंगा परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 302 PF में 19 सितंबर की रात वन्यजीवों के शिकार के लिए बांस की खूंटियों पर GI तार बिछाकर करंट प्रवाहित किया गया था। आरोप है कि भकुर्रा गांव के 4 आरोपियों ने शिकार की नीयत से यह जाल बिछाया था।
Q2. इस साजिश का खुलासा कैसे हुआ?
— 18 सितंबर से हाथियों का दल लैलूंगा में विचरण कर रहा था। 19 सितंबर रात 12 बजे एक हाथी करंट वाले तार के संपर्क में आ गया, जिससे चिंगारी, आग की लपटें उठीं और हाथी की जोरदार चिंघाड़ सुनाई दी। वन अमले ने मौके पर जाकर तार और कांच की शीशियों का जाल देखा और रातभर घेराबंदी शुरू कर दी।
Q3. आरोपी कौन हैं और उन पर क्या कार्रवाई हुई?
— गिरफ्तार आरोपी: 1. सुशील (40) पिता नानसाय लोहार, 2. शील सागर (42) पिता मुटून कलंगा, 3. करमसिंह (25) पिता बनाऊ कलंगा, 4. धोबा (60) पिता लुकेश्वर कलंगा — सभी निवासी भकुर्रा। वन विभाग ने प्रकरण क्र. 20290/16 दिनांक 20.09.2026 दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय से जेल भेज दिया है।
Q4. वन विभाग ने क्या कदम उठाए हैं?
— DFO सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन और Ranger A.S. किंडो के नेतृत्व में ट्रैकिंग टीम ने कार्रवाई की। हाथियों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी गई है, सरपंचों-कोटवारों से मुनादी कराई गई है और ग्रामीणों से अपील की गई है कि संदिग्ध तार या गतिविधि दिखे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें।



