CG Politics: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हालिया सिंगापुर दौरे को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने इस यात्रा को जनता के पैसों की ‘फिजूलखर्ची’ करार दिया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार से कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार को प्रदेश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन दौरों से वास्तव में राज्य को क्या हासिल हुआ है।
पिछले विदेश दौरों और निवेश के आंकड़ों पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने याद दिलाया कि इससे पहले मुख्यमंत्री जापान और दक्षिण कोरिया के दौरे पर गए थे, और वित्त मंत्री ओपी चौधरी तथा उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार यह सार्वजनिक करे कि इन तमाम दौरों और एमओयू (MoU) के जरिए छत्तीसगढ़ में असल जमीन पर कितना निवेश उतरा, कितनी परियोजनाएं शुरू हुईं और कितने युवाओं को रोजगार मिला।
एमओयू के बड़े आंकड़ों और वास्तविक निवेश में अंतर
प्रेस विज्ञप्ति में सरकार द्वारा पेश किए गए निवेश के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अगस्त 2025 और मार्च 2026 में सरकार ने लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और एमओयू होने के बड़े-बड़े दावे किए थे। पार्टी का कहना है कि सिर्फ कागजी आंकड़े या प्रस्ताव दिखाने से काम नहीं चलेगा, सरकार को यह बताना चाहिए कि उनमें से वास्तविक निवेश धरातल पर कितना आया है।
उद्योग नीति और अनुकूल माहौल के अभाव का आरोप
कांग्रेस ने राज्य सरकार की उद्योग नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशों से नए निवेशकों को आकर्षित करना केवल बयानों से संभव नहीं है। इसके लिए ठोस विदेश नीति, स्पष्ट उद्योग नीति, श्रम कानून और निवेशकों को वास्तविक राहत देने वाली नीतियों की जरूरत होती है। कांग्रेस के अनुसार, भाजपा सरकार राज्य में उद्योगों के अनुकूल सही माहौल बनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
“भाजपा के लिए उद्योग विकास का मतलब अडानी का एकाधिकार”
अपने बयान के अंत में कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के लिए उद्योगों के विकास का एकमात्र अर्थ ‘अडानी का एकाधिकार’ स्थापित करना रह गया है। कोल माइनिंग, आयरन ओर और बॉक्साइड के बाद अब सीमेंट उद्योगों पर भी निशाना साधा जा रहा है। कांग्रेस ने दावा किया कि एसईसीएल और कोल इंडिया की खदानों का काम दबावपूर्वक सौंपकर छत्तीसगढ़ के संसाधन चुनिंदा उद्योगपतियों पर लुटाए जा रहे हैं।



