बुधवार, 7 अक्तूबर 2026 बुध, 7 अक्तू॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
छत्तीसगढ़

CG RERA: प्लॉट का कब्जा न देने पर प्रमोटर को ब्याज सहित लौटाने होंगे 33.70 लाख रुपये

CG RERA: छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने रियल एस्टेट सेक्टर में आबंटियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एक और कड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने एक महत्वपूर्ण प्रकरण में फैसला सुनाते हुए प्रमोटर को आबंटी की जमा राशि को भारी-भरकम ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया है। यह आदेश […]

CGRERA building office in Raipur
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

CG RERA: छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने रियल एस्टेट सेक्टर में आबंटियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एक और कड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने एक महत्वपूर्ण प्रकरण में फैसला सुनाते हुए प्रमोटर को आबंटी की जमा राशि को भारी-भरकम ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश उन तमाम बिल्डर्स और डेवलपर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं करते या मनमाने ढंग से समझौते रद्द कर देते हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला रायपुर के सेजबहार स्थित वत्सल्य डेवलपर्स से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, एक आबंटी ने वर्ष 2012 में इस प्रोजेक्ट के तहत एक आवासीय प्लॉट बुक करवाया था। इसके लिए प्रमोटर के साथ विधिवत अनुबंध किया गया था, जिसके तहत आबंटी ने अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए वर्ष 2012 से 2015 के बीच किस्तों में कुल 15 लाख 9 हजार 300 रुपये का भुगतान कर दिया था।

भुगतान के बाद भी नहीं मिला प्लॉट का कब्जा

नियमों और अनुबंध के मुताबिक तय राशि का पूरा भुगतान किए जाने के बावजूद, प्रमोटर द्वारा आबंटी को प्लॉट का भौतिक कब्जा प्रदान नहीं किया गया। सालों तक चक्कर काटने और वादों के बावजूद जब जमीन या प्लॉट नहीं मिला, तो आबंटी की चिंताएं बढ़ने लगीं। एक खरीदार के लिए वर्षों तक अपनी खून-पसीने की कमाई फंसी रहना मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद कष्टदायक था।

बिना पूर्व सूचना के रद्द कर दी गई बुकिंग

मामले में लापरवाही की हद तब पार हो गई जब प्रमोटर ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के आबंटी की बुकिंग ही निरस्त (कैंसिल) कर दी। आबंटी को भरोसे में लिए बिना और बिना किसी नोटिस के बुकिंग रद्द करने की इस कार्रवाई ने प्रमोटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। पैसे भी जमा और बुकिंग भी खत्म, इस दोहरी मार से आबंटी को तगड़ा झटका लगा।

CGRERA की शरण में पहुँचा मामला

जब प्रमोटर की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो आबंटी ने अपने अधिकारों की रक्षा और न्याय की गुहार लगाते हुए छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) के समक्ष आधिकारिक आवेदन प्रस्तुत किया। प्राधिकरण के सामने सभी प्रामाणिक दस्तावेज, रसीदें और अनुबंध पत्र रखे गए, जिससे साबित हुआ कि आबंटी ने अपनी तरफ से कोई चूक नहीं की थी।

दस्तावेजों के परीक्षण के बाद प्राधिकरण का कड़ा आदेश

CGRERA ने प्रकरण में प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों, अनुबंध पत्रों और उपलब्ध अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण किया। प्राधिकरण ने पाया कि प्रमोटर का यह कृत्य नियमों के विरुद्ध और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। इसके बाद, प्राधिकरण ने आबंटी के पक्ष में स्पष्ट और कड़ा आदेश पारित करते हुए न्याय सुनिश्चित किया।

मूल राशि और भारी-भरकम ब्याज का भुगतान

प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, प्रमोटर वत्सल्य डेवलपर्स को आबंटी द्वारा जमा की गई मूल राशि 15 लाख 9 हजार 300 रुपये लौटानी होगी। इसके साथ ही विलंब और मानसिक प्रताड़ना को ध्यान में रखते हुए 18 लाख 60 हजार 956 रुपये का ब्याज भी चुकाना होगा। इस प्रकार कुल मिलाकर 33 लाख 70 हजार 256 रुपये की बड़ी राशि आबंटी को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा संदेश

CGRERA का यह निर्णय यह स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं में प्रमोटरों के लिए आबंटियों के साथ किए गए अनुबंधों और वैधानिक दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना अनिवार्य है। समय पर कब्जा न देना या मनमाने ढंग से बुकिंग रद्द करना अब बिल्डर्स को भारी पड़ सकता है। इस फैसले से आम नागरिकों और आबंटियों का RERA व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन