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छत्तीसगढ़ की इन 2 पहलों ने दिलाया SKOCH Award, जनजातीय विरासत से वनाधिकार तक ऐसे बदली तस्वीर

Chhattisgarh Tribal Welfare Department को जनजातीय विरासत के संरक्षण और वनाधिकारों की निरंतर सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए अभिनव कार्यों के लिए प्रतिष्ठित SKOCH Award से सम्मानित किया गया है। विभाग को यह सम्मान AADI VIRASAT और मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार जैसी दो महत्वपूर्ण पहलों के लिए मिला है। इन परियोजनाओं को तीन स्तरीय […]

Chhattisgarh Tribal Welfare Department receives SKOCH Award for tribal heritage and forest rights initiatives
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Chhattisgarh Tribal Welfare Department को जनजातीय विरासत के संरक्षण और वनाधिकारों की निरंतर सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए अभिनव कार्यों के लिए प्रतिष्ठित SKOCH Award से सम्मानित किया गया है। विभाग को यह सम्मान AADI VIRASAT और मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार जैसी दो महत्वपूर्ण पहलों के लिए मिला है। इन परियोजनाओं को तीन स्तरीय प्रस्तुतीकरण, मूल्यांकन और Public Voting की प्रक्रिया के बाद चुना गया।

इस उपलब्धि में तत्कालीन टीम लीडर और प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, IAS की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्हें SKOCH Award की प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उन्होंने दोनों परियोजनाओं के संबंध में Jury के सामने प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद Jury और Public Voting के जरिए विभाग के प्रयासों का चयन हुआ। परियोजना से जुड़े विभागीय अधिकारी बीके राजपूत, संयुक्त सचिव और श्रीकांत शुक्ला, ओएसडी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

AADI VIRASAT से नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास

AADI VIRASAT के तहत दो महत्वपूर्ण संग्रहालयों का निर्माण किया गया है। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय शामिल है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री जी ने नवंबर 2025 में किया था। इसके अलावा राज्य के पहले जनजातीय संग्रहालय का भी निर्माण किया गया है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री जी ने मई 2025 में किया था। इन संग्रहालयों में जनजातीय इतिहास, वीरता और जीवंत संस्कृति को डिजिटल तकनीक के साथ प्रस्तुत किया गया है। AR/VR और immersive experiences के माध्यम से जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

वनाधिकार से जुड़े अधिकारों पर जोर

वहीं मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार पहल के जरिए वनाधिकार को केवल एक बार मिलने वाला अधिकार नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। इस पहल में वनाधिकार से जुड़े अधिकारों के उत्तराधिकार, अभिलेखों को अद्यतन रखने और हितग्राहियों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और आदिम जाति विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने विभागीय अधिकारियों और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस सम्मान को छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों की विरासत और अधिकारों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान बताया। SKOCH Award के जरिए जनजातीय विरासत संरक्षण, वनाधिकार और अधिकार-आधारित सुशासन से जुड़े छत्तीसगढ़ के इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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