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Jheeram Valley Massacre: झीरम घाटी हत्याकांड पर दीपक बैज बोले- ‘छोटे नक्सलियों को सजा, बड़े षड्यंत्रकारी सरकार की गोद में बचे

Jheeram Valley Massacre: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए (NIA) कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अदालत के फैसले को ‘आधा-अधुरा न्याय’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने केवल उन्हीं लोगों को सजा दी […]

Congress President Deepak Baij
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Jheeram Valley Massacre: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए (NIA) कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अदालत के फैसले को ‘आधा-अधुरा न्याय’ करार दिया है।

उन्होंने कहा कि अदालत ने केवल उन्हीं लोगों को सजा दी है जिनके खिलाफ सबूत पेश किए गए, लेकिन इस बड़ी घटना के असली षड्यंत्रकारी और बड़े नक्सली नेता आज भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।

एनआईए की जांच दिशाहीन और अधूरी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही है। एजेंसी ने केवल छोटे-मोटे काम करने वाले, रास्ता बताने या गड्ढा खोदने वाले निचले स्तर के नक्सलियों को आरोपी बनाया और उन्हें सजा मिली। घटना के राजनीतिक षड्यंत्र और मास्टरमाइंड तक एनआईए कभी नहीं पहुंच पाई।

बड़े नक्सली नेताओं के नाम चार्जशीट से क्यों हटाए गए?

दीपक बैज ने सवाल उठाया कि शुरुआती एफआईआर में गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) और रमन्ना जैसे बड़े शीर्ष नक्सलियों के नाम शामिल थे और उनके खिलाफ वारंट भी जारी हुआ था, लेकिन सितंबर 2014 की चार्जशीट से उनके नाम क्यों हटा दिए गए? इसके अलावा बसवराजू, सुजाता और भूपति जैसे सरेंडर कर चुके बड़े इनामी नक्सलियों से पूछताछ क्यों नहीं की गई?

सुरक्षा हटाने और राजनीतिक साजिश के बिंदु अनसुलझे

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस फैसले से झीरम हमले की असली साजिश का पर्दाफाश नहीं हुआ है। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा अचानक क्यों हटाई गई थी? हमले की योजना किसने बनाई थी? इन गंभीर सवालों के जवाब आज भी अनुत्तरित हैं। घायलों और चश्मदीदों के बयान तक ठीक से दर्ज नहीं किए गए।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों को संरक्षण का आरोप

बैज ने दावा किया कि कई बड़े नक्सली नेताओं और कमांडर्स ने अलग-अलग समय पर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। सरकार की समर्पण नीति का फायदा उठाकर वे खुले घूम रहे हैं और उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और संदिग्ध सरेंडर नक्सलियों का नार्को टेस्ट होना चाहिए।

भाजपा पर झीरम का सच छिपाने का गंभीर आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि झीरम का सच सामने आए। भाजपा नेताओं ने न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लिया और जब छत्तीसगढ़ सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन किया, तो एनआईए जांच रोकने के लिए कोर्ट पहुंच गई। कांग्रेस ने इसे सरकार और नक्सलियों की कथित साठ-गांठ का प्रमाण बताया है।

  • झीरम हत्याकांड पर एनआईए कोर्ट के फैसले पर दीपक बैज ने इसे ‘आधा-अधुरा न्याय’ बताया है और कहा है कि बड़े षड्यंत्रकारी बच निकले हैं।
  • कांग्रेस अध्यक्ष ने बड़े नक्सली नेताओं गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) और रमन्ना सहित अन्य शीर्ष नक्सलियों के नाम चार्जशीट से हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
  • दीपक बैज के अनुसार एनआईए ने केवल छोटे नक्सलियों, रास्ता बताने वालों और निचले स्तर के सहयोगियों को आरोपी बनाया है।
  • कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और संदिग्ध सरेंडर नक्सलियों के नार्को टेस्ट की मांग की है।
  • झीरम जांच को लेकर भाजपा पर आरोप लगाया गया है कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का सच सामने आए, इसलिए जांच रोकने के प्रयास किए गए।
Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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