CG Dhan Kharidi: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर धान खरीदी का मुद्दा गरमा गया है। साल के सबसे बड़े पर्व दीपावली के ठीक पहले प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है।
कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार के सामने मांग रखी है कि किसानों की आर्थिक स्थिति और त्योहारी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीपावली से पहले ही धान की खरीदी शुरू की जाए, ताकि अन्नदाताओं के हाथ खाली न रहें।
किसानों को मिले अग्रिम राशि का भुगतान
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि सरकार को तय समय पर धान खरीदी की प्रशासनिक तैयारियों में कोई दिक्कत आ रही है, तो विकल्प के तौर पर हर किसान के बैंक खाते में धान के एवज में अग्रिम राशि का भुगतान किया जाए। बाद में जब आधिकारिक रूप से धान खरीदी शुरू होगी, तब इस अग्रिम राशि को उसमें समायोजित किया जा सकता है।
कर्मचारियों की तरह किसानों को भी मिले त्योहारी अग्रिम का लाभ
कांग्रेस ने तर्क दिया है कि जिस प्रकार दीपावली के पावन अवसर पर देश और राज्य के कामगारों, सरकारी व निजी कर्मचारियों को बोनस और अग्रिम वेतन देने की परंपरा है, उसी तर्ज पर किसानों को भी उत्सव मनाने के लिए अग्रिम राशि मिलनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो किसान अपने सबसे बड़े त्योहार पर आर्थिक तंगी से जूझने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
राज्योत्सव की परंपरा तोड़कर 15 दिन देरी से खरीदी करने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जब से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ है, तब से हर साल राज्योत्सव (1 नवंबर) के दिन से ही धान खरीदी शुरू करने की स्वस्थ परंपरा रही है। हालांकि, पिछले दो वर्षों से सरकार 15 दिन की देरी से धान खरीदी शुरू कर रही है, जिसके पीछे मंش यह होती है कि कम से कम किसानों का धान खरीदना पड़े। इस बार भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए गए हैं।
एमएसपी में वृद्धि जोड़कर 3358 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान की मांग
पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों में केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कुल 258 रुपये की वृद्धि की है। वर्ष 2023 के 3100 रुपये के वादे में इस 258 रुपये को जोड़कर किसानों को 3358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिलना चाहिए। महंगाई के मौजूदा दौर में पुरानी दरें पूरी तरह से नाकाफी साबित हो रही हैं।
समर्थन मूल्य और जमीनी हकीकत में भारी अंतर
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार किसानों को समर्थन मूल्य बढ़ाने का केवल ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन हकीकत में पिछले दो सत्रों से किसानों को बढ़ा हुआ लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा पिछले खरीफ सीजन में टोकन कटने, बारदाना मिलने, धान उठाव, गिरदावरी और रकबा सत्यापन जैसी जटिल समस्याओं के कारण किसानों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी।
प्रशासनिक लापरवाही न दोहराए सरकार
विपक्ष ने पिछले सीजन की दुखद घटनाओं की याद दिलाते हुए कहा कि धान बेचने में आ रही प्रशासनिक बाधाओं के कारण कई किसानों ने तनाव में आकर कीटनाशक पीकर आत्महत्या तक की कोशिश की थी। कई अन्नदाताओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस बार इस तरह की अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति बिल्कुल न हो।
कांग्रेस पार्टी की चार प्रमुख मांगें
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस पार्टी ने सरकार के समक्ष चार सूत्रीय मांग पत्र जारी किया है:
दीपावली के पहले धान खरीदी शुरू हो या किसानों को अग्रिम भुगतान दिया जाए।
21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान की पूरी खरीदी की जाए।
वर्षवार एमएसपी की वृद्धियों को जोड़कर कुल 3358 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान की घोषणा हो।
किसानों को पिछले साल की तरह टोकन और बारदाना के लिए परेशान न होना पड़े।



