Chhattisgarh High Court में लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सख्ती दिखाई है। विभाग ने राज्य शासन से जुड़े लंबित कोर्ट प्रकरणों में संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
समय सीमा में जवाब नहीं देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। विभाग ने इसे प्रशासनिक रूप से गंभीर मामला माना है।
बिलासपुर हाई कोर्ट के मामलों पर नजर
नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के मुताबिक, बिलासपुर हाई कोर्ट में राज्य शासन से जुड़े कई प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं। इन मामलों में संबंधित अधिकारियों को प्रभारी या सहायक प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद कई मामलों में अब तक कोर्ट के सामने जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। विभाग ने इसी स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
अधिकारियों को जारी किया गया पत्र
संचालनालय ने इस संबंध में सभी संयुक्त संचालकों, नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में लंबित प्रकरणों की समीक्षा करने और तय समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों को अपने स्तर पर मामलों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कई मामलों में जवाब नहीं देने का कारण भी स्पष्ट नहीं
विभाग ने कहा है कि कई प्रकरणों में लंबे समय से जवाब दाखिल नहीं किया गया है। कुछ मामलों में जवाब नहीं देने का कारण भी स्पष्ट नहीं किया गया है। विभाग ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए लंबित मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट से जुड़े प्रकरणों में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
15 दिन की तय हुई समय सीमा
विभाग ने साफ किया है कि जिन लंबित मामलों में अभी तक जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ है, उनमें 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से जवाब दाखिल करना होगा। संबंधित अधिकारियों को कोर्ट प्रकरणों की लगातार निगरानी करने और निर्धारित समय सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
समय पर जवाब नहीं दिया तो कार्रवाई
विभाग ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अब लंबित कोर्ट मामलों की समीक्षा और जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। विभाग के निर्देश के बाद लंबित प्रकरणों में जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।



