Collector’s order quashed: जमीन के मालिकाना हक से जुड़े एक पुराने विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राजनांदगांव कलेक्टर के आदेश को रद्द कर दिया है। कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 57(2) के तहत दाखिल आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने इसे उचित नहीं मानते हुए कलेक्टर को 60 दिन में नियमानुसार फैसला करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी।
राजनांदगांव के बांसपाईपारा निवासी बसंत लाल की मृत्यु के बाद उनके कानूनी वारिस शशि बाला लाल, शिशिर लाल, कीर्ति लाल और शिरीष लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कलेक्टर के 13 जून 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि 3 नवंबर 1978 को उनके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित किया गया था, जिससे पहले न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की गई।
कलेक्टर ने सुनवाई से किया था इनकार
बाद में वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों के निर्देश पर याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार से संपर्क किया और निजी पक्ष से जुड़े जमीन के मालिकाना हक के विवाद को सुलझाने के लिए कलेक्टर के समक्ष धारा 57(2) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। लेकिन कलेक्टर ने 13 जून 2022 को इस आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कलेक्टर के इनकार को अनुचित मानते हुए आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित आवेदन पर सभी जरूरी पक्षों को सुनने के बाद कानून के मुताबिक निर्णय लिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आदेश की प्रति के साथ 15 दिन के भीतर कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होने को कहा है। कलेक्टर को सभी पक्षों को पर्याप्त अवसर देकर धारा 57(2) के तहत 60 दिन के भीतर कानून के अनुसार फैसला करना होगा।
मालिकाना हक पर कोई अंतिम फैसला नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने जमीन विवाद के वास्तविक अधिकार या दावे पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अब आगे की कार्रवाई कलेक्टर स्तर पर सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. हाईकोर्ट ने कलेक्टर का कौन सा आदेश रद्द किया?
— 13 जून 2022 को राजनांदगांव कलेक्टर ने धारा 57(2) के तहत आवेदन पर सुनवाई से इनकार किया था, जिसे हाईकोर्ट ने अनुचित मानते हुए रद्द कर दिया।
Q2. हाईकोर्ट ने कलेक्टर को क्या निर्देश दिया?
— जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने सभी पक्षों को सुनवाई का मौका देकर 60 दिन के भीतर कानून के अनुसार फैसला करने का निर्देश दिया, याचिकाकर्ताओं को 15 दिन में कलेक्टर के समक्ष पेश होने को कहा है।
Q3. क्या हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक पर फैसला दिया?
— नहीं, हाईकोर्ट ने गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी, सिर्फ प्रक्रियात्मक आदेश रद्द कर कलेक्टर को नियमानुसार सुनवाई करने को कहा है।



