Significant Verdict by the Court: आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़ी टिप्पणी करते हुए 4 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ मारपीट हो जाने भर से यह साबित नहीं होता कि किसी को आत्महत्या के लिए उकसाया गया है।
यह मामला लखपतिया बाई एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य का है। इस पर जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया। अभियोजन के मुताबिक मृतका अपने होने वाले पति के घर रह रही थी। उसके दूर के रिश्तेदारों ने दोनों के साथ रहने पर आपत्ति जताई। इसी बात पर विवाद बढ़ा और आरोपियों ने युवती और उसके होने वाले पति के साथ मारपीट की। आरोप था कि इस घटना से आहत होकर युवती ने 5 दिन बाद जहर खाकर जान दे दी।
ट्रायल कोर्ट ने दी थी 10 साल की सजा, फिर हाईकोर्ट पहुंचे आरोपी
दरअसल निचली अदालत ने इस मामले में चारों आरोपियों को IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दोषी मानते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन मारपीट की घटना तो साबित कर पाया, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि मारपीट का मकसद युवती को आत्महत्या के लिए उकसाना था। कोर्ट ने कहा – धारा 306 के लिए स्पष्ट मंशा, उकसाने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रमाण, और घटना में निकटता (proximity) होना जरूरी है। यहां मारपीट और मौत के बीच 5 दिन का लंबा अंतर था। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था जो बताए कि आरोपियों ने जानबूझकर उसे आत्महत्या की ओर धकेला हो।
सुसाइड नोट पर भी उठे सवाल, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की गवाही नहीं
आरोपियों ने सुसाइड नोट के आधार पर हुई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट को एक्सपर्ट की गवाही से साबित ही नहीं किया गया। कोर्ट ने इस दलील को भी गंभीरता से लिया।
कोर्ट की बड़ी टिप्पणी और 4 आरोपी बरी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का अवसाद, निराशा या किसी घटना के प्रति अत्यधिक संवेदनशील प्रतिक्रिया के कारण आत्महत्या कर लेना, अपने आप में दूसरे व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं है, जब तक उकसाने या जानबूझकर आत्महत्या की ओर धकेलने का प्रमाण न हो। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 34 के तहत दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. हाईकोर्ट ने 4 आरोपियों को क्यों बरी किया?
कोर्ट ने कहा कि 5 दिन पहले हुई मारपीट भर से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित नहीं होता। इसके लिए स्पष्ट मंशा और उकसाने का ठोस सबूत जरूरी है, जो अभियोजन पेश नहीं कर पाया।
Q2. यह किस केस में फैसला आया?
लखपतिया बाई एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य केस में जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने यह फैसला सुनाया, जिसमें ट्रायल कोर्ट की 10 साल की सजा को रद्द किया गया।
Q3. कोर्ट ने धारा 306 को लेकर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि किसी का अवसाद या संवेदनशीलता के कारण आत्महत्या कर लेना, दूसरे को दोषी बनाने के लिए काफी नहीं, जब तक जानबूझकर उकसाने या आत्महत्या की ओर धकेलने का प्रमाण न हो।



