शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2026 शुक्र, 16 अक्तू॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
छत्तीसगढ़

MBBS Fee Refund: छत्तीसगढ़ में मनमाने तरीके से वसूली करने वाले तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर जुर्माना, छात्रों को फीस लौटाने के निर्देश

MBBS Fee Refund: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा जगत में उस वक्त हलचल मच गई जब राज्य सरकार ने तीन प्रमुख निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के खिलाफ ऐतिहासिक और सख्त कार्रवाई की। इन कॉलेजों पर एमबीबीएस के विद्यार्थियों से छात्रावास (हॉस्टल), मेस और बस परिवहन के नाम पर नियमों को ताक पर […]

निजी मेडिकल कॉलेजों पर प्रशासनिक कार्रवाई और छात्रों को फीस रिफंड का आदेश
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

MBBS Fee Refund: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा जगत में उस वक्त हलचल मच गई जब राज्य सरकार ने तीन प्रमुख निजी चिकित्सा महाविद्यालयों के खिलाफ ऐतिहासिक और सख्त कार्रवाई की।

इन कॉलेजों पर एमबीबीएस के विद्यार्थियों से छात्रावास (हॉस्टल), मेस और बस परिवहन के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर भारी-भरकम और अनुचित राशि वसूलने का गंभीर आरोप सिद्ध हुआ है। चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति ने मामले की कड़ाई से जांच करते हुए इन संस्थानों पर कड़ा डंडा चलाया है।

एक महीने के भीतर छात्रों के बैंक खातों में लौटानी होगी अतिरिक्त फीस

शासन की ओर से जारी कड़े आदेश के मुताबिक, तीनों निजी मेडिकल कॉलेजों को सत्र 2022-23 से लेकर 2024-25 के दौरान विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त और अवैध फीस को सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कॉलेज प्रशासन तय समय सीमा के अंदर राशि वापस नहीं करता है, तो उन्हें मूल राशि के साथ 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भी भुगतान करना होगा।

संस्थानों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना और मान्यता रद्द की चेतावनी

विद्यार्थियों से नियमों के विरुद्ध जाकर की गई वसूली को गंभीरता से लेते हुए शासन ने तीनों महाविद्यालयों पर 10-10 लाख रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) लगाया है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निर्देशों का पालन समय पर नहीं किया गया, तो संस्थानों की मान्यता रद्द करने की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने तीनों कॉलेजों के डीन को नोटिस जारी कर तत्काल प्रभाव से अनुपालन प्रतिवेदन (Compliance Report) प्रस्तुत करने को कहा है।

वैकल्पिक सुविधाओं को बना दिया था अनिवार्य, हो रही थी अवैध वसूली

प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि हॉस्टल, मेस और बस परिवहन जैसी सुविधाएं छात्रों के लिए पूरी तरह वैकल्पिक होनी चाहिए। ये सेवाएं ‘बिना लाभ और बिना हानि’ के सिद्धांत पर संचालित होनी चाहिए थीं। इसके बावजूद, इन तीनों महाविद्यालयों ने इन सभी सुविधाओं को सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य कर दिया था, जिससे छात्रों पर बेवजह का आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।

परिवहन और मेस के नाम पर हजारों की जगह वसूल रहे थे लाखों रुपये

जांच के दौरान एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया। कई संस्थानों में कॉलेज परिसर के भीतर ही हॉस्टल होने के बावजूद विद्यार्थियों से बस परिवहन के नाम पर हर साल 1 लाख से 2.50 लाख रुपये तक वसूले जा रहे थे, जबकि समिति की जांच में वास्तविक परिवहन खर्च महज 4,600 रुपये से 13,700 रुपये प्रति छात्र सालाना पाया गया। समिति ने इस मनमानी को छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था अधिनियम, 2008 के तहत अवैध केपिटेशन फीस घोषित किया है।

वित्तीय जांच में खुली पोल: फर्जी खर्च और मेस के नाम पर धांधली

जांच समिति के वित्त सदस्य द्वारा की गई पड़ताल में कॉलेज प्रशासनों की बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हुईं। कॉलेज प्रशासन वास्तविक खर्चों के स्पष्ट दस्तावेज और अलग से बैलेंस शीट पेश करने में असमर्थ रहे। एक महाविद्यालय ने तो गर्मियों की छुट्टियों में मेस पूरी तरह बंद रहने के बावजूद पूरे वर्ष सब्जी, आलू और प्याज का एक समान मासिक खर्च 2.50 लाख रुपये दर्शा दिया था। साथ ही अस्पताल और कॉलेज का संयुक्त बिजली बिल भी छात्रों के हॉस्टल बिल में जोड़ दिया गया था।

विद्यार्थियों और अभिभावकों ने ली राहत की सांस, मिली वित्तीय राहत

चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस ऐतिहासिक और सख्त कदम से प्रदेश के मेडिकल छात्रों और उनके पालकों ने बेहद राहत महसूस की है। शासन द्वारा निर्धारित 7.45 लाख से 7.99 लाख रुपये की ट्यूशन फीस के अलावा इन अतिरिक्त शुल्कों के नाम पर हर छात्र से 5 लाख रुपये से अधिक की राशि जबरन वसूली जा रही थी। अब इस आदेश के बाद छात्रों की जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा और उनमें न्याय की उम्मीद जगी है।

भविष्य के लिए निजी शिक्षण संस्थानों को कड़ी चेतावनी

शासन के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में यदि कोई भी निजी शिक्षण संस्थान नियमों को ताक पर रखकर छात्रों या उनके अभिभावकों का आर्थिक शोषण करने की कोशिश करेगा, तो उस पर सख्त से सख्त प्रशासनिक और विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है और वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए मजबूर हो गए हैं।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन