Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर की जा रही अमर्यादित टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी आक्रोश है। इसी कड़ी में सोमवार को राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील भाषा और भद्दी गालियों के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया गया है।
मामले का पूरा विवरण देते हुए शिकायतकर्ता एवं राष्ट्रवादी विचारक वीरेंद्र दुबे ने पुलिस को साक्ष्य सौंपे हैं। जानकारी के अनुसार, इंस्टाग्राम पर ‘सागर निर्मलकर’ नामक एक आईडी से वीडियो पोस्ट किया गया था। इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में ‘@quail.3131469’ नामक यूजर आईडी से संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के लिए बेहद आपत्तिजनक और भद्दी भाषा का प्रयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना का स्वागत है, लेकिन इस तरह की बदजुबानी को अभिव्यक्ति की आजादी का नाम नहीं दिया जा सकता।
लगातार बढ़ रहे मामले
प्रदेश में बीते कुछ समय से जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विशिष्ट व्यक्तियों को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर भ्रामक व अपमानजनक सामग्री परोसने के मामले बढ़े हैं। इससे पहले भी राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर पुलिस ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए कई फर्जी और गुमनाम अकाउंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य के प्रमुख आदिवासी नेताओं में से एक हैं, ऐसे में इस तरह की दुर्भावनापूर्ण टिप्पणियों को सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की साजिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
पुलिस ने क्या कहा ?
रायपुर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की तकनीकी जांच और प्राथमिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत जांच आगे बढ़ाई जा रही है। साइबर सेल की मदद से संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट्स, मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस को ट्रैक किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर जल्द ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समाज पर पड़ता नकारात्मक असर
डिजिटल दुनिया में बिना किसी डर के की जाने वाली इस प्रकार की अभद्रता से समाज में द्वेष और नकारात्मकता फैलती है। इस घटना से साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया निगरानी प्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई न होने से असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ता है, जिससे इंटरनेट माध्यमों पर शांति और सौहार्द का माहौल प्रभावित होता है।


