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डामर के दाम बढ़े तो छत्तीसगढ़ में संकट, 25 हजार करोड़ के काम प्रभावित, सड़क निर्माण पर लगा ब्रेक!

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में सड़क, भवन, स्कूल, कॉलेज और हॉस्टल से जुड़े करीब 25 हजार करोड़ रुपए के सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित होने की जानकारी सामने आ रही है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ के मुताबिक, बढ़ती निर्माण लागत के कारण कई ठेकेदारों ने काम रोक दिया है, जबकि कई परियोजनाओं की रफ्तार काफी धीमी […]

Bitumen price rise impacts road construction projects in Chhattisgarh
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में सड़क, भवन, स्कूल, कॉलेज और हॉस्टल से जुड़े करीब 25 हजार करोड़ रुपए के सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित होने की जानकारी सामने आ रही है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ के मुताबिक, बढ़ती निर्माण लागत के कारण कई ठेकेदारों ने काम रोक दिया है, जबकि कई परियोजनाओं की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। इनमें करीब 15 हजार करोड़ रुपए के सड़क निर्माण कार्य शामिल हैं।

निर्माण कार्यों पर सबसे ज्यादा असर डामर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बताया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च 2026 को डामर की दर 59,339 रुपए प्रति टन थी, जो 24 अप्रैल तक बढ़कर 98 हजार रुपए प्रति टन से ज्यादा पहुंच गई। इसमें 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल नहीं है। इसके अलावा सीमेंट की कीमत में भी करीब 50 रुपए प्रति बोरी तक बढ़ोतरी बताई गई है।

एडवांस भुगतान के बाद भी नहीं मिली डामर की सप्लाई

ठेकेदारों के मुताबिक, कई मामलों में पेट्रोलियम कंपनियों को डामर के लिए पहले ही एडवांस भुगतान किया जा चुका था। इसके बावजूद पुरानी दर पर सामग्री की सप्लाई नहीं हो सकी। कंपनियों की ओर से मौजूदा दर पर ही डामर उपलब्ध कराने की बात कही गई। इससे पुराने टेंडर रेट पर काम कर रहे ठेकेदारों के सामने लागत और भुगतान के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

150 से ज्यादा टेंडर आगे बढ़े

डामर की सप्लाई प्रभावित होने और कीमतों में बढ़ोतरी का असर सरकारी विभागों के टेंडरों पर भी पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, राज्य में 150 से अधिक टेंडर आगे बढ़ाए गए हैं। सड़क निर्माण के अलावा भवन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं भी इसकी चपेट में हैं। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर पुराने अनुबंध के अनुसार काम करना मुश्किल हो गया है।

केंद्र ने मूल्य समायोजन की व्यवस्था की

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से ठेकेदारों को राहत देने के लिए मूल्य समायोजन की व्यवस्था की गई है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 1 अप्रैल को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने इस मुद्दे को रखा था। इसके बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 17 अप्रैल 2026 को निर्देश जारी किए। इसमें डामर की कीमत बढ़ने से होने वाले अतिरिक्त खर्च के लिए 1 अप्रैल से 30 जून 2026 तक मूल्य समायोजन का प्रावधान किया गया है।

महासमुंद में 7 करोड़ के डामरीकरण का काम रुका

महासमुंद के तुमगांव-अछोला मार्ग पर 9.6 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण चल रहा है। करीब 6.5 किलोमीटर हिस्से में डामरीकरण का काम बाकी बताया गया है। ठेकेदार के मुताबिक, इस हिस्से में डामर का काम करीब 7 करोड़ रुपए का है। कीमत बढ़ने के कारण काम रोकना पड़ा है और पुराने रेट पर निर्माण जारी रखना संभव नहीं बताया गया है।

राजनांदगांव-खैरागढ़ सड़क पर भी असर

राजनांदगांव-खैरागढ़ मार्ग करीब 34 किलोमीटर लंबा है और इसकी निर्माण लागत करीब 88 से 90 करोड़ रुपए बताई गई है। परियोजना की समयसीमा मार्च 2027 निर्धारित है। ठेका कंपनी के मुताबिक, डामर की कीमत में हुई वृद्धि के चलते निर्माण की गति प्रभावित हुई है और तय समय पर काम पूरा करने में परेशानी आ सकती है।

रायपुर एक्सप्रेस-वे और कचना ओवरब्रिज भी प्रभावित

रायपुर के एक्सप्रेस-वे रिन्यूअल प्रोजेक्ट की लागत करीब 17 करोड़ रुपए है। ठेकेदार को मार्च से काम शुरू करना था, लेकिन डामर की कीमत बढ़ने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। वहीं करीब 35 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे कचना ओवरब्रिज में भी डामरीकरण का काम बाकी बताया गया है। ब्रिज फिलहाल बंद है।

बीएआई ने सरकार से राहत की मांग की

बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ ने पीडब्ल्यूडी, पीएचई और ईएनसी समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर राहत की मांग की है। संगठन ने डीजल, लाइट डीजल ऑयल, स्टील, सीमेंट और बिटुमिन की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए मूल्य समायोजन, फोर्स मेज्योर और अन्य अनुबंधीय प्रावधानों पर विचार करने की मांग की है।

सरकारी कंपनियों के जरिए होती है डामर की सप्लाई

छत्तीसगढ़ में डामर की सप्लाई मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों के जरिए होती है। जानकारी के मुताबिक, रायपुर स्थित पेट्रोलियम डिपो में भी डामर के स्टॉक को लेकर दबाव की स्थिति बनी हुई है। कंपनियों के सप्लाई नेटवर्क के जरिए डामर अलग-अलग जिलों तक पहुंचता है और ठेकेदार जरूरत के अनुसार सामग्री खरीदते हैं।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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