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कोरबा में SIR को लेकर मचा बवाल, 1500 से अधिक मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए साजिश रचने का आरोप, सूची में अधिकांश नाम समुदाय विशेष के…

कोरबा में SIR को लेकर मचा बवाल, 1500 से अधिक मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए साजिश रचने का आरोप, सूची में अधिकांश नाम समुदाय विशेष के…
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
TRP अलर्ट्स

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कोरबा। जिले में SIR की प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद जो मतदाता बाहर चले गए हैं, उनका नाम विलोपित करने के लिए डेढ़ हजार से ऊपर आवेदन फॉर्म 7 में भरकर जमा किये गए हैं, इन नामों की सूची जैसे ही वायरल हुई, पूरे शहर में तहलका मच गया। दरअसल इस सूची में 1566 मतदाताओं के नाम शामिल हैं और इनमें से लगभग 98% मुस्लिम हैं और शेष ईसाई और अन्य हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि जो भी नाम विलोपन सूची में हैं उनमे अधिकांश अपने पते पर ही निवासरत हैं। आरोप लग रहे हैं कि पार्टी विशेष के द्वारा षड्यंत्रपूर्वक फॉर्म भरवाकर जमा किये गए हैं।

क्या है विलोपन सूची में..?

दरअसल कोरबा विधानसभा क्षेत्र में सोशल मीडिया और वार्डों के ग्रुप में 1566 मतदाताओं के नाम को विलोपित करने के लिए जमा आवेदन की एक सूची वायरल हो रही है। इस सूची में लगभग 98% नाम अल्पसंख्यक समुदाय विशेष के लोगों के हैं और बाकी अन्य मतदाता।

बता दें कि SIR के काम में BLO के सहयोग के लिए राजनितिक दलों की ओर से BLA नियुक्त किये गए थे। इनका काम मतदाताओं के सहयोग के साथ ही इसकी निगरानी भी करना था कि कोई मतदाता कहीं और चला गया हो, बावजूद इसके उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया हो, तो ऐसे लोगों का डिटेल फॉर्म 7 में भरकर निर्वाचन कार्यालय में जमा करना था। कोरबा SDM सरोज महिलांगे ने TRP न्यूज़ को बताया कि 21 जनवरी को काफी संख्या में फॉर्म 27 जमा किये गए थे, जिनके आधार पर जांच के लिए सूची तैयार की गई। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दल के BLA के माध्यम से यह आवेदन नाम विलोपन के लिए फॉर्म -7 में भरकर दिए गए हैं जिसे BLO को सत्यापन करना है। हालांकि उन्होंने भी स्वीकार किया कि अधिकांश ऐसे लोगों के नाम हैं, जो वास्तव में अपने मूल पते पर रहते हैं।

तहसील कार्यालय में लोगों का मजमा लगा

यह सूची वायरल होने के बाद इस बात को लेकर बेचैनी और परेशानी बढ़ गई है कि आखिर ऐसा कैसे हो रहा है? सारे दस्तावेज देने के बाद हमारा नाम विलोपन सूची में क्यों आया है, हमारा नाम विलोपित करने के लिए किसने और क्यों आवेदन दिया है? इन तमाम सवालों को लेकर संबंधित लोग कोरबा तहसील स्थित निर्वाचन कार्यालय पहुंच गए। यहां इन्हें बताया गया कि संबंधित BLA ने फॉर्म जमा कराये हैं, जिसकी जांच की जाएगी।

छांट-छांट कर डाले गए नाम

निर्वाचन कार्यालय कोरबा द्वारा जारी सूची का अवलोकन किया जाये तो नजर आता है कि एक-एक BLA ने पांच, दस या फिर इससे ज्यादा फॉर्म नंबर 7 जमा किया है, और इनमें सीरियल से मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम हैं। वहीं बीच-बीच में इक्का-दुक्का ईसाई समुदाय के लोगों के भी नाम दर्ज हैं। यह सूची कोरबा विधानसभा के अधिकांश वार्डों की है और
इसको देखने से ही यह समझ आ रहा है कि कुछ दिनों पूर्व निर्वाचन विभाग द्वारा चिन्हित मतदाताओं की जो 'सूची' तैयार की गई है, उसी में से
चुन-चुन कर समुदाय विशेष के मतदाताओं के नाम का फार्म 7 भरकर जमा किया गया है। अब जिनके नाम हैं वे परेशान हैं।

मतदाताओं और BLA के बीच बढ़ा विवाद

निर्वाचन कार्यालय कोरबा तहसील द्वारा जारी की गई इस सूची को लेकर लोगों के बीच विवाद बढ़ गया है। दरअसल सूची में मतदाताओं के नाम के आगे जिस BLA का उल्लेख है, वह भी उसी वार्ड के रहने वाले हैं, सभी एक दूसरे से परिचित हैं। संबंधित मतदाता उन BLA को पकड़कर उनसे पूछ रहे हैं कि उनके मूल पते पर रहते हुए भी उनका नाम काटने के लिए कैसे दे दिया गया। इस बात को लेकर झगड़े भी हो रहे हैं।

फॉर्म भरने की बात से BLA कर रहे इंकार

आलम यह है कि मतदाता का नाम सूची से काटने के लिए जिन BLA की तरफ से फॉर्म जमा किये गए हैं, उनका अपनी सफाई में कहना है कि उन्हें इसके बारे में कुछ पता ही नहीं है। ऐसे अनेक BLA सामने आये हैं जो इस कृत्य से खुद को अनभिज्ञ बता रहे हैं।

कुछ BLA ने थाने में की शिकायत

बता दें कि मतदाताओं का नाम सूची से काटने के लिए जिन BLA का नाम और उनका इपिक नंबर उल्लेखित वे अधिकांश 'भाजपा' के स्थानीय कार्यकर्त्ता हैं और पार्टी की ओर से उन्हें BLA बनाया गया था। अब जब सूची में उनका नाम उजागर हुआ तब वे फॉर्म भरने से इंकार कर रहे हैं। इनका कहना है कि हमारे नाम का दुरूपयोग कर फर्जी आवेदन दिया गया है। ऐसे ही कुछ भाजपा के BLA ने कोरबा के कोतवाली थाने में लिखित में शिकायत की है।

वरिष्ठ भाजपा नेता भागेन्द्र सोनी, शंकर तिवारी, शत्रुघ्न सिंह, राजेश कुमार विश्वकर्मा, मो. यासिन ने कोतवाली में की गई लिखित शिकायत में कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनके नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल बिना उनकी सहमति के किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने संबंधी कोई आवेदन नहीं दिया है। उन्होंने शिकायत में इस कृत्य को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

गुस्साए अल्पसंख्यक समुदाय ने प्रशासन से की शिकायत

इस वाकये के बाद से कोरबा के अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में भारी नाराजगी और तनाव का माहौल है। इनका कहना है कि यह केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में सेंधमारी का गंभीर प्रयास है। इस मुद्दे को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपर कलेक्टर कोरबा, देवेंद्र पटेल से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि
इस मामले में दोषियों को बेनकाब किया जाये, उन ‘अज्ञात’ व्यक्तियों की सूची सार्वजनिक की जाए जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए हैं। झूठी शिकायत कर प्रशासन को गुमराह करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। इसके अलावा कोरबा में SIR की प्रक्रिया पर पर तब तक रोक लगाने की मांग की गई है जब तक शत-प्रतिशत जांच पूरी न हो और किसी भी नाम को सूची से विलोपित न किया जाए।

मुस्लिम समुदाय निकालेगा मौन जुलूस

इस बीच SIR के मुद्दे पर सुन्नी मुस्लिम जमात की बैठक कोरबा में रखी गई और उसके बाद आयोजित प्रेस वार्ता में जमात के अध्यक्ष एखलाख खान ने बताया कि जिस तरह की सूची जारी हुई है, उसमें पूरी तरह षड्यंत्र नजर आ रहा है। पूर्व में जैसी आशंका जताई जा रही थी, वैसा ही होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले 9 फरवरी को मुस्लिम समुदाय कलेक्ट्रेट तक मौन जुलूस निकालेगा। इसके बाद कलेक्टर से मुलाकात कर इस षड्यंत्र को लेकर विरोध दर्शाया जायेगा। इस मौके पर शहर के वे सैकड़ों मतदाता भी जुलूस में शामिल होंगे जिनके मूल पते पर रहते हुए भी उनके नाम काटने के लिए फॉर्म भरे गए हैं।

अब देखना है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर क्या रुख अपनाता है और क्या ऐसे लोग उजागर होंगे जिन्होंने फर्जी तरीके से फॉर्म 7 भरकर हजारों मतदाताओं के नाम काटने के लिए निर्वाचन कार्यालय में आवेदन जमा कर दिया।

मुस्लिम समाज द्वारा प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन :

The Rural Press ब्यूरो
लेखक / पत्रकार:

The Rural Press ब्यूरो

सम्पादकीय डेस्क (The Rural Press Editorial Team)

The Rural Press की विशेष सम्पादकीय एवं ग्रामीण खोजी पत्रकारिता टीम। जमीनी मुद्दों, कृषि संकट और निष्पक्ष जनसरोकार की विश्वसनीय रिपोर्टिंग।

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