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CG Congress: कांग्रेस अध्यक्ष ने धान खरीदी और बस्तर में मुरिया दरबार पर सरकार को घेरा

Paddy Procurement and Muria Darbar: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के उस बयान का कड़ा जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले 50 वर्षों में कांग्रेस ने आदिवासियों के लिए कुछ नहीं […]

धान खरीदी में देरी , राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Paddy Procurement and Muria Darbar: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के उस बयान का कड़ा जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले 50 वर्षों में कांग्रेस ने आदिवासियों के लिए कुछ नहीं किया।

बैज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज यदि विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, तो इसके पीछे भी कांग्रेस पार्टी की दूरदर्शी नीतियां और संविधान प्रदत्त अधिकार ही हैं।

आदिवासियों के अधिकारों और कांग्रेस का योगदान

पत्रकारों से चर्चा करते हुए पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से जनजातीय समाज की संस्कृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा की है। पिछले पांच दशकों में कांग्रेस ने आदिवासियों की मूल संस्कृति को बचाए रखा है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा है। बैज ने याद दिलाया कि संविधान में आदिवासियों के लिए विशेष अधिकार, सरकारी नौकरियों में आरक्षण, विधानमंडल में प्रतिनिधित्व और पेसा कानून जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं केवल और केवल कांग्रेस पार्टी की ही देन हैं।

दिल्ली में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने घोषणा की कि आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से एक विशाल ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की जा रही है। इस राष्ट्रीय स्तर की रैली में छत्तीसगढ़ से भी कांग्रेस पार्टी के तमाम बड़े पदाधिकारी, वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। यह रैली केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी तंत्र में सुधार की मांग को लेकर होगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

बैज ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर के निरस्तीकरण और देश भर में काटे गए वोटों की बहाली की मांग को लेकर कांग्रेस का यह आंदोलन बेहद महत्वपूर्ण है। जब तक चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और आम जनता के मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से लगातार जारी रहेगा।

धान खरीदी की तिथि घोषित न होने पर किसानों की चिंता

दीपक बैज ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आज 24 अक्टूबर बीत चुका है, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से धान खरीदी की कोई भी अधिकृत तारीख घोषित नहीं की गई है, जिसके चलते अन्नदाता भारी चिंता और असमंजस में हैं। पिछली व्यवस्थाओं के अनुसार राज्योत्सव यानी 1 नवंबर या दीपावली के आसपास धान खरीदी शुरू हो जाती थी, जिससे किसानों को त्योहार मनाने में आर्थिक मदद मिलती थी।

धान के मूल्य की मांग

धान खरीदी की तैयारियों पर तंज कसते हुए बैज ने कहा कि धरातल पर न तो खरीदी केंद्रों पर कोई तैयारी दिख रही है और न ही बारदाने की उपलब्धता का कोई अता-पता है। कांग्रेस मांग करती है कि दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू की जाए या फिर किसानों को अग्रिम भुगतान दिया जाए। इसके अलावा, इस वर्ष समर्थन मूल्य 3,158 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने और भाजपा के 3,100 रुपये के चुनावी वादे में पिछले सालों की बढ़ोतरी (258 रुपए) जोड़कर किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किए जाने की मांग उठाई गई।

मुरिया दरबार पर मजाक बनाने का आरोप

बस्तर के प्रसिद्ध मुरिया दरबार के मुद्दे पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुरिया दरबार आम जनता और आदिवासियों का पारंपरिक दरबार है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे एक मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बस्तर आईं, जिसका स्वागत है, लेकिन बस्तर के मूलवासियों को इससे क्या मिला? उन्होंने बस्तर दौरे के दौरान प्रोटोकॉल और आयोजनों में हुई चूकों पर भी गहरी आपत्ति जताई।

काछन देवी विवाद और पनका समाज की नाराजगी

दीपक बैज ने बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार के दौरान हुए एक बड़े विवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के सामने काछन देवी की परंपरा को ही बदलकर दिखाया गया, जहां काछन देवी की जगह दूसरी बच्ची को खड़ा कर फर्जी तरीके से प्रदर्शित किया गया। इस घटना से स्थानीय पनका समाज और आदिवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं, समाज में भारी नाराजगी है और इसे आदिवासियों की संस्कृति का सीधा अपमान बताया गया।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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