CG News: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों से घबराई हुई मोदी सरकार ने पूरी दिल्ली को एक छावनी और किले में तब्दील कर दिया है।
राजधानी की ओर आने वाली ट्रेनों और बसों को रोका जा रहा है, और यहां तक कि एम्बुलेंस को भी रोककर चेकिंग की जा रही है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मोदी सरकार अपने देश के युवाओं से पूरी तरह डर चुकी है। इसके बावजूद देश भर से लाखों प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच चुके हैं और जब तक ‘वोट चोर’ ज्ञानेश कुमार और वोट चोरी के जरिए प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
रोजगार मेलों के नाम पर युवाओं के साथ छलावा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य सरकार की रोजगार नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार रोजगार मेले लगवाकर प्राइवेट कंपनियों में 10 हजार रुपये महीने की नौकरी दिलवा रही है, जो बेरोजगारों के जले पर नमक छिड़कने के समान है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने ‘मोदी की गारंटी’ के तहत 5 साल में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी विभागों में 1 लाख 10 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। अकेले शिक्षा विभाग में 57 हजार, स्वास्थ्य विभाग में 18 हजार, पुलिस और आदिवासी विकास विभागों में हजारों पद रिक्त हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार में थोड़ी भी इच्छाशक्ति हो, तो वह एक महीने के भीतर इन सभी पदों पर युवाओं को सरकारी नौकरी दे सकती है।
छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था पूरी तरह लाचार और बेपटरी
प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए दीपक बैज ने कहा कि राज्य में अब कानून का राज समाप्त हो चुका है। सूरजपुर के प्रतापपुर में अपराधियों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला कर दिया जाता है, और महासमुंद में वन्यजीवों की तस्करी रोकने गए वन विभाग के कर्मचारियों को 7 घंटे तक बंधक बनाकर रखा जाता है। जिला मुख्यालय से पुलिस बल भेजने के बाद उन्हें छुड़ाया जा सका। इन घटनाओं से साफ जाहिर होता है कि प्रदेश का प्रशासनिक अमला पूरी तरह लाचार हो चुका है और मौजूदा सरकार से कानून-व्यवस्था नहीं संभल रही है।
1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करे और दे उचित समर्थन मूल्य
खरीफ फसल की कटाई का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि सरकार आगामी 1 नवंबर से प्रदेश में धान खरीदी की प्रक्रिया तत्काल शुरू करे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के 65 प्रतिशत किसान हरहुना धान बोते हैं, जो दशहरे के बाद और दीपावली से पहले कटकर तैयार हो जाते हैं, लेकिन सरकार की ओर से बारदानों की व्यवस्था, सोसायटियों के फंड, भुगतान के लिए बजट या परिवहन के टेंडर को लेकर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है।
3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो धान की खरीदी
बैज ने मांग करते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों में केंद्र सरकार ने धान के एमएसपी में कुल 258 रुपये की वृद्धि की है। वर्ष 2023 के वादे के अनुसार 3100 रुपये में उस राशि को जोड़कर किसानों को 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एकमुश्त राशि मिलनी चाहिए। इस खरीफ सीजन में पोटास और एनपीके जैसे उर्वरकों की कीमतें भारी मात्रा में बढ़ाई गई हैं, जिसके कारण महंगाई के अनुपात में वर्तमान दरें नाकाफी हैं। एमएसपी का पूरा लाभ न मिलने से किसानों को प्रति एकड़ भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।



