शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 शुक्र, 25 सित॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
छत्तीसगढ़

Dhamtari: चर्चों के बाहर क्यों लगाए गए ‘केवल ईसाइयों के प्रवेश’ वाले बोर्ड?, क्रिश्चियन फोरम ने बताई ये वजह

Non-Christians are barred from entering churches: धमतरी जिले में लगभग 30 से 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों के बाहर ‘केवल ईसाइयों के प्रवेश’ वाले बोर्ड लगाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इनमें धमतरी का 116 साल पुराना ऐतिहासिक मेनोनाइट चर्च भी शामिल है। बोर्ड पर साफ लिखा है – “चर्च भवन […]

Dhamtari: चर्चों के बाहर क्यों लगाए गए ‘केवल ईसाइयों के प्रवेश’ वाले बोर्ड?, क्रिश्चियन फोरम ने बताई ये वजह
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Non-Christians are barred from entering churches: धमतरी जिले में लगभग 30 से 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों के बाहर ‘केवल ईसाइयों के प्रवेश’ वाले बोर्ड लगाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इनमें धमतरी का 116 साल पुराना ऐतिहासिक मेनोनाइट चर्च भी शामिल है। बोर्ड पर साफ लिखा है – “चर्च भवन में प्रार्थना के लिए प्रवेश केवल ईसाइयों के लिए है।”

धमतरी क्रिश्चियन फोरम के महासचिव डायमंड फिलस ने कहा कि यह फैसला किसी को रोकने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए लिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से कुछ संगठन चर्चों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश को लेकर सवाल उठा रहे थे। प्रार्थना सभा के दौरान शोर-शराबा, विरोध प्रदर्शन और वीडियोग्राफी से मसीही समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही थीं। बार-बार पुलिस-प्रशासन को दखल देना पड़ रहा था।

इसी अव्यवस्था को रोकने के लिए यह बोर्ड लगाए गए हैं। फिलस ने स्पष्ट किया कि गैर-ईसाइयों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। अगर कोई श्रद्धाभाव से प्रार्थना में शामिल होना चाहता है तो आ सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में उसकी सुरक्षा और उपस्थिति की जिम्मेदारी स्वयं उसकी होगी।

प्रशासन ने बुलाई थी शांति समिति की बैठक

बताया जा रहा है कि प्रार्थना और चंगाई सभाओं को लेकर लगातार बढ़ रहे तनाव के बाद प्रशासन ने शांति समिति की बैठक बुलाई थी। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर चर्चा हुई थी, जिसके बाद फोरम ने यह निर्णय लिया।

प्रशासन में जमा 1500 आवेदनों पर क्या कहा ?

कलेक्ट्रेट में जमा 1500 आवेदनों को लेकर उड़ रही अफवाहों पर भी फोरम ने स्थिति साफ की है। डायमंड फिलस ने कहा कि ये धर्मांतरण की अनुमति मांगने वाले आवेदन नहीं हैं, बल्कि स्वेच्छा घोषणा पत्र हैं। इनमें लोगों ने लिखा है कि वे बिना किसी दबाव, भय या प्रलोभन के अपनी मर्जी से प्रार्थना सभा में शामिल हो रहे हैं। ये कलेक्टर से वैधानिक स्वीकृति लेने के लिए जमा नहीं किए गए हैं।

फोरम ने बताई फैसले की वजह

क्रिश्चियन फोरम का कहना है कि प्रार्थना सभाओं और चंगाई सभाओं को लेकर उन पर लगातार प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए जाते हैं, जिन्हें फोरम ने गलत बताया है। उनका दावा है कि बाहरी लोगों के आने से कई बार विवाद की स्थिति बनती है और अंततः पुलिस एवं प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है। फोरम के मुताबिक, इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए चर्चों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि विवाद की स्थिति और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को रोका जा सके।

गौरतलब है कि धमतरी में पिछले कुछ महीनों से चंगाई सभाओं को लेकर हिंदू संगठनों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है और धर्मांतरण के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसे क्रिश्चियन फोरम ने सिरे से खारिज किया है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

Q1. धमतरी में चर्चों के बाहर कैसे बोर्ड लगाए गए हैं?

— धमतरी जिले के 30 से 40 चर्चों और प्रार्थना स्थलों के बाहर ‘प्रवेश केवल ईसाइयों के लिए’ वाले बोर्ड लगाए गए हैं, जिसमें 116 साल पुराना मेनोनाइट चर्च भी शामिल है।

Q2. क्रिश्चियन फोरम ने बोर्ड लगाने की क्या वजह बताई?

— फोरम के महासचिव डायमंड फिलस ने कहा कि गैर-ईसाइयों के आने से प्रार्थना के दौरान शोर-शराबा और विवाद होता था, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है, पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

Q3. कलेक्ट्रेट में जमा 1500 आवेदनों का क्या मामला है?

— फोरम ने स्पष्ट किया कि ये धर्मांतरण की अनुमति के आवेदन नहीं, बल्कि स्वेच्छा घोषणा पत्र हैं जिनमें लोगों ने बिना दबाव प्रार्थना सभा में शामिल होने की बात कही है।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन