Chhattisgarh DMF Scam: छत्तीसगढ़ के जिला खनिज न्यास निधि (DMF) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
इसके साथ ही सतपाल सिंह चाबड़ा, मंदीप चावला समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, DMF की राशि से होने वाली खरीदी में 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूले जाने का आरोप है।
25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूली का आरोप
ED की जांच में सामने आया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण एवं विकास के लिए निर्धारित DMF राशि का कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से सरकारी अधिकारियों, एजेंटों और बिचौलियों का एक नेटवर्क काम कर रहा था। आरोप है कि DMF की रकम से होने वाली खरीदी में कुछ कार्यों और आपूर्तियों को प्राथमिकता दी गई। इनकी कीमतें बढ़ाकर दिखाई जाती थीं और इसके बदले अवैध कमीशन वसूला जाता था। ED का दावा है कि रेट कॉन्ट्रैक्ट धारक कंपनियों को जारी खरीद आदेशों की मूल राशि पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। इस रकम का बड़ा हिस्सा खरीद आदेश जारी कराने, DMF फंड आवंटित कराने और भुगतान करवाने के बदले सरकारी अधिकारियों तथा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था।
नकद और बैंक खातों के जरिए रकम का लेनदेन
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित कमीशन की रकम नकद और बैंकिंग माध्यमों से एकत्र की जाती थी। इसके बाद अलग-अलग कंपनियों और बैंक खातों के जरिए राशि को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जाता था। ED के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए अपराध से अर्जित रकम को वैध दिखाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि बीज निगम के माध्यम से DMF के अलावा अन्य मदों से होने वाली खरीदी में भी इसी तरह कमीशन वसूले जाने की बात सामने आई है।
सतपाल सिंह चाबड़ा को सिंडिकेट की अहम कड़ी बताया
ED ने अपनी जांच में सतपाल सिंह चाबड़ा को कथित सिंडिकेट का प्रमुख बिचौलिया और वित्तीय समन्वयक बताया है। एजेंसी के मुताबिक, चुनिंदा विक्रेताओं को काम दिलाने, खरीद आदेश जारी कराने, भुगतान करवाने और अवैध कमीशन के संग्रह तथा वितरण में उसकी अहम भूमिका थी। ED ने सतपाल सिंह चाबड़ा को 1 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।
31.70 करोड़ की नई संपत्ति अटैच, अब तक 50 करोड़ की कार्रवाई
इस मामले में ED ने 29 अक्टूबर 2026 को प्रिविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किया था। इसके तहत करीब 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ लगभग 35 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का पता लगाया गया है। वहीं, इस मामले में अब तक करीब 50 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।
IAS रानू साहू समेत चार आरोपी गिरफ्तार
ED ने बताया है कि DMF घोटाले की जांच में अब तक IAS अधिकारी रानू साहू समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ताजा कार्रवाई के साथ 17 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच जारी
ED के अनुसार, DMF राशि के कथित दुरुपयोग, अवैध कमीशन के संग्रह और वितरण तथा अपराध से अर्जित रकम को वैध बनाने में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अन्य एजेंटों की भूमिका की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।



