Raipur News: रायपुर में गोठान संचालकों का बकाया भुगतान नहीं होने का मामला अब विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। शुक्रवार को गोठान संचालक और गोसेवक गायों को गाड़ियों में लेकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने निगम के खिलाफ नाराजगी जताते हुए बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। इस दौरान अधिकारियों से उनकी तीखी बहस भी हुई।
गोठान संचालकों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया है। इसी के विरोध में शुक्रवार को भाठागांव से नगर निगम मुख्यालय तक गोधन न्याय यात्रा निकाली गई। प्रदर्शनकारी तीन गाड़ियों में चारा और गायों को लेकर पहुंचे। उन्होंने भुगतान में देरी के लिए निगम को जिम्मेदार ठहराते हुए जल्द बकाया राशि जारी करने की मांग की।
260 गायों के लिए अनुबंध, गोठान में पहुंचा दी गईं 550 से ज्यादा
फुंडहर स्थित गोठान के संचालन के लिए नगर निगम ने समिति के साथ 260 गायों की देखरेख का अनुबंध किया था। संचालक का कहना है कि इसके बावजूद गोठान में 550 से ज्यादा गायें भेज दी गईं। अतिरिक्त पशुओं की देखभाल में खर्च बढ़ता गया, लेकिन निगम ने अनुबंध में तय संख्या के आधार पर ही भुगतान किया। इसी अंतर को लेकर संचालक और निगम के बीच विवाद बना हुआ है।
44 लाख रुपये का भुगतान, फिर भी पुराना बकाया बाकी
गोठान संचालक के मुताबिक, जून, जुलाई और अगस्त के लिए करीब 44 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। हालांकि, नवंबर से मई तक की बकाया राशि अब भी अटकी हुई है। संचालक का कहना है कि अतिरिक्त गायों की देखरेख पर हुए खर्च का भुगतान भी किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने निगम मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी।
आयुक्त से मुलाकात की मांग, अधिकारियों ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान गोठान संचालक और गोसेवक निगम आयुक्त से मुलाकात करने की मांग पर अड़े रहे। बाद में संचालक विक्रांत शर्मा ने अधिकारियों के सामने बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया। अपर आयुक्त विनोद पांडेय से भी इस विषय पर बहस हुई। निगम आयुक्त ने फाइल का परीक्षण कर जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया है।
अनुबंध खत्म होने वाला, आगे गोठान चलाने से पीछे हटे संचालक
फुंडहर गोठान के संचालक विक्रांत शर्मा ने कहा कि निगम के साथ उनका अनुबंध 3 अक्टूबर को समाप्त हो चुका है। भुगतान में देरी और अधिकारियों के साथ अब तक के अनुभव को देखते हुए उन्होंने आगे गोठान का संचालन करने में रुचि नहीं होने की बात कही। उनका कहना है कि बकाया भुगतान नहीं मिलने से आगे काम जारी रखना मुश्किल हो गया है।
अतिरिक्त गायों के लिए शेड निर्माण की भी उठी जरूरत
गोठान में निर्धारित संख्या से अधिक गायें पहुंचने के बाद उनके लिए अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, शेड निर्माण के लिए प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने 25 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। संचालक का कहना है कि पशुओं की संख्या के अनुरूप व्यवस्था और भुगतान नहीं होने से परेशानी बढ़ी। अब बकाया राशि को लेकर निगम और गोठान संचालक के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है।



