Chhattisgarh High Court Medical College Fees: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के दो निजी मेडिकल कॉलेजों की हॉस्टल, मेस और परिवहन फीस में कटौती करने और विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाने के आदेश रद्द कर दिए हैं। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और श्रीबालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की याचिकाएं स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नए सिरे से फीस निर्धारित करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि शुल्क तय करते समय कॉलेजों के वास्तविक खर्च, विद्यार्थियों की संख्या और वित्तीय दस्तावेजों का उचित आकलन करना होगा।
3 लाख रुपये फीस का प्रस्ताव, समिति ने घटाकर 78 हजार किया था शुल्क
श्रीबालाजी मेडिकल कॉलेज ने प्रति विद्यार्थी सालाना हॉस्टल और मेस के लिए 3 लाख रुपये तथा परिवहन के लिए 2.5 लाख रुपये शुल्क प्रस्तावित किया था। प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने हॉस्टल-मेस का शुल्क घटाकर 78,059 रुपये और परिवहन शुल्क 13,719 रुपये निर्धारित किया था। समिति की अनुशंसा के आधार पर विद्यार्थियों से पहले वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाने का निर्देश भी दिया गया था। दोनों मेडिकल कॉलेजों ने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया और इसके आधार पर जारी सरकारी आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कॉलेजों ने कहा, वास्तविक खर्च का सही आकलन नहीं हुआ
मेडिकल कॉलेजों की दलील थी कि फीस निर्धारित करते समय भवनों के खर्च, कर्मचारियों के वेतन, बिजली, रखरखाव, ईंधन और विद्यार्थियों को दी जाने वाली दूसरी सुविधाओं पर होने वाले वास्तविक व्यय का सही आकलन नहीं किया गया। संस्थानों ने यह भी कहा कि अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों में कुल विद्यार्थियों और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की संख्या बदलती रही है। इसके बावजूद समिति ने एक समान आधार पर शुल्क तय कर दिया। कॉलेजों ने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
सितंबर 2025 के सरकारी आदेश भी रद्द
इस मामले में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने 3 अप्रैल 2025 को अपनी अनुशंसा जारी की थी। इसके बाद राज्य शासन ने 18 सितंबर 2025 और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने 23 सितंबर 2025 को आदेश जारी किए थे। इन्हीं आदेशों के तहत दोनों निजी मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क में कटौती की गई थी। हाईकोर्ट ने इन आदेशों को रद्द कर प्रकरण नए सिरे से विचार के लिए राज्य सरकार के पास भेज दिया है।
फीस तय करते समय किन बातों का ध्यान रखना होगा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियामक समिति को मुनाफाखोरी और निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूली रोकने का अधिकार है। हालांकि, फीस निर्धारित करने की प्रक्रिया में कॉलेजों की ओर से पेश किए गए प्रासंगिक वित्तीय दस्तावेजों पर भी विचार करना जरूरी है। अदालत के मुताबिक, केवल सुनवाई का अवसर देना पर्याप्त नहीं है। संस्थानों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों का निष्पक्ष आकलन भी होना चाहिए। समिति की अनुशंसा में वास्तविक खर्च, हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या और विभिन्न मदों पर होने वाले व्यय पर उचित विचार किए जाने का स्पष्ट आधार नहीं दिखा।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार और संबंधित शुल्क निर्धारण समिति को दोनों मेडिकल कॉलेजों के वित्तीय दस्तावेजों और विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या के आधार पर दोबारा फीस तय करनी होगी। इस प्रक्रिया में कॉलेजों को अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर भी देना होगा। फिलहाल अदालत ने नए शुल्क की कोई राशि निर्धारित नहीं की है। ऐसे में हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क कितना होगा, यह नए सिरे से होने वाली प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।



