बुधवार, 4 नवंबर 2026 बुध, 4 नवं |
संस्करण:
छत्तीसगढ़

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट : पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे बदतर, छत्तीसगढ़ के जेलों में क्षमता से 45% ज्यादा कैदी, न्यायपालिका में जजों की भारी कमी

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट : पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे बदतर, छत्तीसगढ़ के जेलों में क्षमता से 45% ज्यादा कैदी, न्यायपालिका में जजों की भारी कमी
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
TRP अलर्ट्स

ताज़ा समाचार तुरंत पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

रायपुर। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 (IJR) ने देश में कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की स्थिति पर एक गहन विश्लेषण पेश किया है। इस रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्थिति चिंताजनक बताई गई है—जहां एक ओर न्यायपालिका में लंबित मामलों और जजों की भारी कमी देखी गई, वहीं दूसरी ओर जेलों की हालत भी बदतर पाई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल देश का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य है, जबकि छत्तीसगढ़ ओवरऑल रैंकिंग में छठे स्थान पर रहा। राज्य ने पुलिस व्यवस्था में बेहतर प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया, लेकिन जेल (13वां स्थान) और न्यायपालिका (8वां स्थान) में इसकी स्थिति डगमगाई रही।

जजों की भारी कमी और लंबित मामले

  • राज्य में उच्च न्यायालयों में 27% और जिला न्यायालयों में 30% पद रिक्त हैं।
  • 2024 तक उच्च न्यायालय में 32% मामले 5 से 10 वर्षों से लंबित हैं, जबकि यह आंकड़ा 2022 में 27% था।
  • जिला अदालतों में भी 10% मामलों की फाइलें 5 से 10 वर्षों से धूल फांक रही हैं।

महिला न्यायाधीशों की भागीदारी भी चिंताजनक है-जहां जिला अदालतों में लगभग 50% जज महिलाएं हैं, वहीं उच्च न्यायालय में यह आंकड़ा महज 6% है। छत्तीसगढ़ ने 8% के साथ देश में पुलिस में महिलाओं की सबसे कम हिस्सेदारी में से एक दर्ज की।

जातीय प्रतिनिधित्व में भी गिरावट

छत्तीसगढ़ SC और ST के लिए अपने कोटे को भरने मेंं असफल रहा है, जबकि OBC के लिए आरक्षित सीटों को भरने में कुछ हद तक बेहतर प्रदर्शन रहा। छत्तीसगढ़ में 2022-25 तक जाति के अनुसार ST-SC और OBC जजों की संख्या में कमी आई है। 2022 में तीनों कटेगरी के जजों की बेहतर स्थिति थी, लेकिन IJR की रैंकिंग में छत्तीसगढ़ में कमी रिकॉर्ड की गई है।

न्यायपालिका में छत्तीसगढ़ की स्थिति खराब

पिछले तीन सालों में केवल 11 बड़े और मध्यम आकार के राज्य ही अधीनस्थ न्यायालयों में रिक्तियों को भरने या बनाए रखने में कामयाब रहे हैं। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में इसी अवधि के दौरान रिक्तियों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई है, जबकि मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में हालात का जायजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2022 में 8.9 परसेंट था, जो अब 2025 में बढ़कर 29.9 हो गई है। जजों की भर्ती नहीं हो रही है, जिससे जजों पर केसों का बोझ चढ़ता जा रहा है। पेंडिंग में चढ़ते जा रहे हैं। खराब स्थिति में गुजरात और सेकेंड पर छत्तीसगढ़ है।

जेलें ओवरलोड, स्टाफ की भारी कमी

  • छत्तीसगढ़ की जेलें अपनी क्षमता से 45% अधिक भरी हुई हैं।
  • 66% जेल अधिकारियों के पद रिक्त हैं, जबकि चिकित्सा व सुधारात्मक कर्मचारियों की भी 50% से अधिक कमी है।
  • गार्डिंग स्टाफ में भी हर तीसरे पद पर कोई नहीं है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
  • पिछले 10 वर्षों में राज्य की जेलों में कैदियों की संख्या 5,850 से बढ़कर 14,143 हो चुकी है।
  • सिर्फ विचाराधीन कैदियों की बात करें तो 26% कैदी 1 से 3 साल से अधिक समय से जेल में हैं, जिनका मुकदमा अब तक पूरा नहीं हो सका है।
The Rural Press ब्यूरो
लेखक / पत्रकार:

The Rural Press ब्यूरो

सम्पादकीय डेस्क (The Rural Press Editorial Team)

The Rural Press की विशेष सम्पादकीय एवं ग्रामीण खोजी पत्रकारिता टीम। जमीनी मुद्दों, कृषि संकट और निष्पक्ष जनसरोकार की विश्वसनीय रिपोर्टिंग।

The Rural Press सम्पादकीय दल सभी खबरें देखें →
विज्ञापन