Kalinga University: अंगदान और प्रत्यारोपण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा लोगों को इसके जीवनरक्षक महत्व के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के नया रायपुर स्थित कलिंगा विश्वविद्यालय में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भारत सरकार की इस विशेष पहल के अनुरूप विश्वविद्यालय परिसर में 6 अक्टूबर 2026 को एआईसीटीई (AICTE) के बहुप्रचारित “जुग जुग जियो अभियान” के अंतर्गत एक भव्य संकल्प (शपथ) एवं जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सहयोग और उद्देश्य: सामाजिक उत्तरदायित्व की संस्कृति
इस प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO), छत्तीसगढ़ के सहयोगात्मक प्रयासों से किया गया था। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कलिंगा विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता और प्रौद्योगिकी विभाग ने संयुक्त रूप से अहम भूमिका निभाई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मन में अंगदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक मजबूत सामाजिक उत्तरदायित्व की संस्कृति का निर्माण करना था।

मुख्य वक्ता डॉ. खेमराज सोनवानी का विशेष उद्बोधन
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य सेवा निदेशालय छत्तीसगढ़ के मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (HOTA) के नोडल अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति (CGSACS) के अतिरिक्त परियोजना निदेशक डॉ. खेमराज सोनवानी विशिष्ट मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने मुख्य भाषण में अंग और ऊतक दान के बारे में विस्तार से तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की। उन्होंने प्रत्यारोपण पर एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए समाज में फैली गलत अवधारणाओं और भ्रांतियों को तार्किक रूप से स्पष्ट किया।
छात्रों और संकाय सदस्यों द्वारा अंगदान का संकल्प
संगोष्ठी के दौरान कार्यक्रम का सबसे मुख्य और प्रेरणादायक हिस्सा अंगदान का औपचारिक संकल्प लेना रहा। विश्वविद्यालय के उच्च नेतृत्व, संकाय सदस्यों और बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने समाज में अंगदान के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने और भविष्य में खुद भी अंगदान करने का संकल्प लिया। सभी ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे दूसरों को भी इस महान कार्य के लिए प्रेरित करेंगे ताकि जरूरतमंदों को नया जीवन मिल सके।

अंगदान अभियान के समानांतर एचआईवी/एड्स जागरूकता
इस आयोजन में केवल अंगदान तक ही सीमित न रहकर स्वास्थ्य से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी जोर दिया गया। अंगदान अभियान के बिल्कुल समानांतर ही प्रतिभागियों के लिए एक विशेष एचआईवी/एड्स जागरूकता सत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें एचआईवी की रोकथाम, स्वास्थ्य शिक्षा, जिम्मेदार व्यवहार अपनाने और इस बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक (stigma) को पूरी तरह समाप्त करने पर विशेष बल दिया गया।
एक अंगदान से कई जिंदगियों को नया जीवन
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं और विशेषज्ञों ने अंगदान के मानवीय और जीवनरक्षक प्रभाव पर गहराई से प्रकाश डाला। इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि एक अकेला अंगदाता (Organ Donor) कई गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों की जिंदगियों को बचाने या उनके जीवन स्तर को सुधारने की अद्भुत क्षमता रखता है। दान किया गया एक अंग किसी परिवार के लिए एक और जन्मदिन मनाने, उत्सव साझा करने और जीने का एक नया अवसर प्राप्त करने का जरिया बन सकता है।
अतिथियों का सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि डॉ. खेमराज सोनवानी को उनके बहुमूल्य योगदान और मार्गदर्शन के लिए विश्वविद्यालय की ओर से सम्मानित किया गया। इसके बाद सत्र का औपचारिक समापन करते हुए छात्र कल्याण के प्रभारी अधिष्ठाता श्री अजय कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रबंधन, संकाय सदस्यों, SOTTO के प्रतिनिधियों और बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले सभी छात्रों के प्रयासों की सराहना की।
जागरूक और संवेदनशील नागरिकों का निर्माण
इस तरह के वृहद आयोजन के माध्यम से कलिंगा विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति समर्पित और संवेदनशील नागरिकों का निर्माण करने के लिए भी कटिबद्ध है। विश्वविद्यालय की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी, जो युवाओं को भविष्य में समाजोपयोगी कार्यों के लिए निरंतर प्रेरित करती रहेगी।



