CSMCL Overtime Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो ने सीएसएमसीएल के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बच्छ राज लोहिया उर्फ बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के काम के लिए 182.98 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान कराया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब दुकानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली पांच मैनपावर एजेंसियों को कुल 182 करोड़ 98 लाख 48 हजार 675 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों को उनके नाम पर दर्शाई गई ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम की राशि नहीं दी गई। इस रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर कमीशन के रूप में अधिकारियों और सिंडिकेट तक पहुंचाया गया।
त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.39 करोड़ रुपये का भुगतान
अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक रहे। ईओडब्ल्यू-एसीबी के अनुसार, उनके कार्यकाल में पांचों एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और सेवा शुल्क के नाम पर 152 करोड़ 39 लाख 77 हजार 666 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि निविदा की शर्तों में बदलाव कर भुगतान और कमीशन की व्यवस्था बनाई गई।
ओवरटाइम और बोनस के नाम पर करोड़ों का हिसाब
जांच एजेंसी के मुताबिक, अतिरिक्त भुगतान में करीब 82.66 करोड़ रुपये ओवरटाइम, 12.21 करोड़ रुपये बोनस, 45.02 करोड़ रुपये चार अतिरिक्त दिनों के काम और 12.51 करोड़ रुपये सेवा शुल्क के शामिल हैं। शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपने बयानों में कहा कि उन्हें सामान्य मासिक वेतन मिलता था, लेकिन उनके नाम पर दिखाई गई अतिरिक्त रकम नहीं दी गई। एजेंसी का दावा है कि इससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।
पांच मैनपावर एजेंसियों के नाम आए सामने
जांच में जिन पांच एजेंसियों को भुगतान किए जाने का उल्लेख है, उनमें सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड, प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड, अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड और ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2019 की निविदा में अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था थी, लेकिन एजेंसियों को पहले कर्मचारियों को रकम देनी थी और उसके बाद सीएसएमसीएल से भुगतान लेना था।
28 से 32 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप
ईओडब्ल्यू-एसीबी ने आरोप लगाया है कि अरुणपति त्रिपाठी ने मैनपावर एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये तक नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। जांच के अनुसार, सिद्धार्थ सिंघानिया एजेंसियों से रकम एकत्र कर पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल था। उसके बयान के मुताबिक, सभी एजेंसियों से मिलाकर हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था। ये आरोप जांच एजेंसी के निष्कर्षों पर आधारित हैं।
ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को 48 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान
पूरक चालान में बीआर लोहिया की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को मिलाकर 48 करोड़ 8 लाख 53 हजार 253 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें ईगल हंटर को 33 करोड़ 45 लाख 5 हजार 110 रुपये और अलर्ट कमांडोज को 14 करोड़ 63 लाख 48 हजार 143 रुपये दिए जाने का विवरण है। आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों को पूरी अतिरिक्त राशि नहीं दी गई।
कमीशन के 28.80 लाख रुपये के मामले में ईडी की कार्रवाई
जांच एजेंसी के अनुसार, नवंबर 2023 में लंबित बिलों को पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को करीब 28.80 लाख रुपये कमीशन दिए जाने थे। आरोप है कि दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक रायपुर भेजा गया था। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयी खर्च के लिए रखे गए और शेष राशि कमीशन के लिए अलग की गई। रकम पहुंचाने के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में यह पैसा बरामद हुआ।
आंगड़िया नेटवर्क के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप
पूरक चालान में नकदी को अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने के लिए आंगड़िया नेटवर्क के इस्तेमाल का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी के मुताबिक, एक गवाह ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच पी. विजय कंपनी तक करीब 60 से 70 करोड़ रुपये नकद पहुंचाने की बात कही। कंपनी के तत्कालीन साझेदार के बयान में रकम मुंबई की एक फर्म तक पहुंचाने और वहां से हैदराबाद भेजे जाने का जिक्र है। इन बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
पहले 12 आरोपितों के खिलाफ पेश हुआ था चालान
ईडी से मिले प्रतिवेदन के सत्यापन के बाद 5 अक्टूबर 2024 को इस मामले में अपराध दर्ज किया गया था। ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 18 मई 2026 को नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों समेत 12 आरोपितों के खिलाफ पहला चालान पेश किया था। आगे की जांच में त्रिपाठी और बीआर लोहिया से संबंधित साक्ष्य मिलने के बाद पूरक चालान पेश किया गया।



