Cotton left inside the woman’s body: मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक के 50 बिस्तर अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां डिलीवरी के बाद महिला के शरीर के अंदर कॉटन का टुकड़ा छोड़ दिया गया, जो 16 दिन तक उसके शरीर में ही फंसा रहा।
यह मामला डेरहाकापा निवासी सत्यवती कुर्रे का है। 21 सितंबर को महिला की अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। इस दौरान ब्लीडिंग ज्यादा होने पर स्टाफ ने कॉटन लगाया था। महिला के अनुसार 7 अक्टूबर को जांच के दौरान उसके शरीर के अंदर कॉटन का टुकड़ा होने की जानकारी सामने आई।

आरोप है कि ड्रेसिंग के दौरान नर्सें वही कॉटन निकालना भूल गईं और वह अंदर ही रह गया।
डिलीवरी के दौरान अधिक ब्लीडिंग होने पर लगाया गया था कॉटन
मिली जानकारी के अनुसार, प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव होने के कारण कॉटन का इस्तेमाल किया गया था। महिला ने आरोप लगाया है कि ड्रेसिंग के दौरान संबंधित स्टाफ नर्सों ने कॉटन को नहीं निकाला, जिसके कारण वह उसके शरीर के अंदर ही रह गया।
महिला को इसके बाद परेशानी होने लगी। जांच और सोनोग्राफी के बाद 7 अक्टूबर को उसे दोबारा अस्पताल लाया गया। आरोप है कि जांच के दौरान शरीर के अंदर कॉटन का टुकड़ा फंसा होने की जानकारी सामने आई, आनन-फानन में कॉटन के दो टुकड़े बाहर निकाले गए।

परेशान महिला की जांच में हुआ खुलासा
इसके बाद महिला को लगातार परेशानी होने लगी। जब दर्द बढ़ा तो जांच और सोनोग्राफी कराई गई। 7 अक्टूबर को महिला को फिर से 50 बिस्तर अस्पताल लाया गया, जहां जांच में शरीर के अंदर कॉटन फंसे होने का खुलासा हुआ।
मेडिकल स्टाफ ने कहा–किसी को मत बताना..!
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज आरोप ये भी है कि कॉटन निकालने के बाद स्टाफ नर्स और डॉक्टर ने महिला से कहा – ‘किसी को मत बताना’। इससे मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लग रहा है। महिला सत्यवती कुर्रे ने कहा कि अगर कॉटन इसी तरह उसके शरीर के अंदर रह जाता तो भविष्य में इन्फेक्शन से उसकी जान भी जा सकती थी।
बीएमओ ने जताई नाराजगी, कहा– जांच के बाद कार्रवाई
मामले को लेकर लोरमी के बीएमओ डॉ. जी.एस. दाऊ ने स्टाफ की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डिलीवरी कराने वाले संबंधित स्टाफ के खिलाफ जांच की जाएगी और लापरवाही की पुष्टि होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद मरीजों की देखभाल और ड्रेसिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर 21 सितंबर को हुई डिलीवरी के बाद 7 अक्टूबर तक कॉटन का टुकड़ा शरीर के अंदर कैसे रह गया? ड्रेसिंग के दौरान इसकी जांच क्यों नहीं हुई? और क्या वास्तव में महिला पर मामले को छिपाने का दबाव बनाया गया?
इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल, मामले में अस्पताल प्रबंधन की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. लोरमी सरकारी अस्पताल में क्या लापरवाही हुई?
Ans. 21 सितंबर को डेरहाकापा की सत्यवती कुर्रे की नॉर्मल डिलीवरी के दौरान ब्लीडिंग रोकने के लिए लगाया गया कॉटन स्टाफ निकालना भूल गया, जो 16 दिन तक शरीर में रहा।
Q2. कॉटन का पता कैसे चला?
Ans. महिला को लगातार दर्द होने पर 7 अक्टूबर को दोबारा अस्पताल लाया गया। जांच और सोनोग्राफी में शरीर के अंदर कॉटन फंसा मिला, जिसे दो टुकड़ों में निकाला गया।
Q3. अस्पताल प्रबंधन ने क्या कहा?
Ans. बीएमओ डॉ. जी.एस. दाऊ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जांच के बाद दोषी स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



