Mahanadi Water Dispute: ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद पर आज अहम बैठक होने जा रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ दोनों राज्यों के अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में महानदी के जल बंटवारे और उसके प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दोनों राज्यों का पक्ष रखा जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि वर्षों पुराने विवाद के समाधान की दिशा में आज अहम प्रगति हो सकती है।
दिल्ली रवाना हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं। रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ महानदी के विषय पर बैठक है। इसमें जल के बंटवारे और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दोनों राज्यों के पक्षों पर चर्चा होगी। बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अलावा दोनों राज्यों के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
भुवनेश्वर दौरे में भी हुई थी महानदी पर चर्चा
इस बैठक से करीब दस दिन पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा का दो दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने महानदी विवाद को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने को लेकर भरोसा जताया था। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उम्मीद जताई थी कि दिवाली से पहले इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल सकता है। इससे पहले 30 जुलाई को जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी दोनों पक्षों ने सहमति जताई थी। महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी आपसी समझौते के विचार का समर्थन किया है। केंद्रीय जल आयोग इस दिशा में कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
आखिर क्या है महानदी जल विवाद?
महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद एक दशक से अधिक समय से चल रहा है। ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी हिस्से में औद्योगिक जरूरतों के लिए बनाए गए बैराजों का असर नदी के निचले प्रवाह पर पड़ता है। ओडिशा के मुताबिक कम बारिश और सूखे के दौरान उसे पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। इसी मुद्दे को लेकर ओडिशा ने 2016 में तत्कालीन जल संसाधन मंत्रालय के समक्ष छत्तीसगढ़ में बनाए जा रहे छह बैराजों को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बना था ट्रिब्यूनल
विवाद के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इसके बाद जल बंटवारे से जुड़े मुद्दे न्यायाधिकरण की प्रक्रिया में रहे। अब दोनों राज्यों के बीच बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशों के बीच केंद्रीय स्तर पर होने वाली आज की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में जल बंटवारे और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों की बात सामने रखी जाएगी।



