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30 लीटर रोज दूध, 15 हजार की शुद्ध आय; जानिए एक गाय से शुरू हुई अगस्तु की Success Story

30 लीटर रोज दूध, 15 हजार की शुद्ध आय; जानिए एक गाय से शुरू हुई अगस्तु की Success Story
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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Dairy Farming Success Story: सरगुजा जिले के ग्राम चटीरमा निवासी अगस्तु खाखा ने पशुपालन की शुरुआत सिर्फ एक गाय से की थी। मेहनत, नियमित देखभाल और पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से उनका छोटा-सा प्रयास आज 10 पशुओं के पशुधन में बदल चुका है।

चार गायों से रोज करीब 30 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है और खर्च निकालने के बाद उन्हें पशुपालन से लगभग 15 हजार रुपये की शुद्ध मासिक आय मिल रही है।

एक गाय से शुरू हुआ सफर

अगस्तु बताते हैं कि जब उन्होंने पशुपालन शुरू किया, तब उनके पास सिर्फ एक गाय थी। इसी दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों से उन्हें पशुओं की बेहतर देखभाल और नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग की सलाह को अपनाया और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा का लाभ लेना शुरू किया। धीरे-धीरे पशुधन बढ़ता गया। इससे उन्हें पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का रास्ता मिला।

10 पशु, रोज 30 लीटर दूध

आज अगस्तु के पास कुल 10 पशु हैं। इनमें चार गायें दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 30 लीटर दूध मिलता है। दूध की नियमित बिक्री से परिवार को लगातार आमदनी हो रही है। चारे, पशुओं की देखभाल और दूसरे जरूरी खर्च निकालने के बाद अगस्तु को करीब 15 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है।

पशुओं की बिक्री से 1.60 लाख रुपये की अतिरिक्त आय

अगस्तु के लिए पशुपालन सिर्फ दूध बेचने तक सीमित नहीं रहा। कृत्रिम गर्भाधान से प्राप्त उन्नत नस्ल के पशुओं ने उनकी आय बढ़ाने में भी भूमिका निभाई। उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान से प्राप्त चार गायों और दो बछड़ों की बिक्री की। इससे उन्हें करीब 1 लाख 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई। इस कमाई ने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ पशुपालन को आगे बढ़ाने का उनका भरोसा भी बढ़ाया।

आगे बढ़ेगा पशुधन, बढ़ेगी कमाई

अगस्तु के पशुधन में फिलहाल दो बछियां गर्भित हैं। आने वाले महीनों में उनसे नए बछड़ों के जन्म की उम्मीद है। इसके अलावा तीन छोटी बछियां भी हैं, जो आगे चलकर पशुधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का आधार बनेंगी। इस तरह एक गाय से शुरू हुआ उनका पशुपालन लगातार विस्तार ले रहा है।

तकनीकी सलाह ने बदला पशुपालन का तरीका

अगस्तु का कहना है कि पशुपालन विभाग से मिली तकनीकी सलाह, कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा और पशुओं की देखभाल से जुड़ा मार्गदर्शन उनके लिए काफी उपयोगी रहा। इससे उन्हें पशुपालन को बेहतर और लाभकारी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिली।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता

The Rural Press के लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग।

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