Kankali Math Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित कंकाली मठ के कपाट विजयादशमी पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुबह 6 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। साल में एक बार खुलने वाले इस मठ में दर्शन के लिए सुबह से ही भक्त पहुंचने लगे।
यहां नागा साधुओं के करीब 1000 साल पुराने बताए जाने वाले कमंडल, कपड़े, चिमटा, त्रिशूल, ढाल और कुल्हाड़ी सहित कई प्राचीन वस्तुओं की विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु रात 12 बजे तक इन वस्तुओं के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद मठ के कपाट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
विजयादशमी पर ही क्यों खुलते हैं कंकाली मठ के कपाट?
कंकाली मठ से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माता कंकाली ने स्वप्न में महंत कृपाल गिरी महाराज को तालाब के किनारे मंदिर बनवाकर अपनी प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद माता की प्रतिमा को मठ से मंदिर में स्थापित किया गया। कहा जाता है कि प्रतिमा की स्थापना के बाद महंत कृपाल गिरी महाराज दुखी रहने लगे। तब माता ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि वह विजयादशमी के दिन अपने पुराने घर यानी मठ में विराजमान होंगी। इसी मान्यता के चलते हर साल दशहरे पर मठ के कपाट खोले जाते हैं और विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन माता कंकाली अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ मठ में विराजमान होती हैं। इसी वजह से इस दिन यहां रखी प्राचीन वस्तुओं के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
नागा साधुओं की प्राचीन वस्तुओं की होती है पूजा
कंकाली मठ में नागा साधुओं से जुड़ी कई प्राचीन वस्तुएं रखी हुई हैं। इनमें कमंडल, कपड़े, चिमटा, त्रिशूल, ढाल और कुल्हाड़ी शामिल हैं। इन वस्तुओं की विशेष पूजा की जाती है। करीब 1000 साल पुरानी बताई जाने वाली इन वस्तुओं को नागा साधुओं की साधना और परंपरा से जुड़ा माना जाता है। विजयादशमी पर मठ के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को इनके दर्शन का अवसर मिलता है।
तांत्रिक साधना का केंद्र रहा है कंकाली मठ
कंकाली मठ का निर्माण श्मशान घाट पर हुआ था। इसे नागा साधुओं की तांत्रिक साधना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। मठ के आसपास नागा साधुओं की समाधियां भी स्थित हैं। मठ और इसके आसपास कई अन्य मंदिर भी हैं। धार्मिक मान्यताओं और साधु परंपरा से जुड़े इतिहास के कारण यह स्थान रायपुर के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है।
करीब 650 साल पुराने कंकाली तालाब का भी महत्व
कंकाली मठ के साथ कंकाली तालाब का भी विशेष धार्मिक महत्व है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह तालाब करीब 650 साल पुराना है और पहले इसे कंकाली कुंड के नाम से जाना जाता था। मान्यता के अनुसार, महंत कृपाल गिरी महाराज ने मंदिर और तालाब का निर्माण कराया था। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं। मंदिर और तालाब से जुड़ी पुरानी मान्यताएं इस स्थान के धार्मिक महत्व को और बढ़ाती हैं।
नवरात्र में ज्योत-जवारा विसर्जन की परंपरा
कंकाली मंदिर और तालाब में चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार, नवमी और दशमी को तालाब में ज्योत और जवारा का विसर्जन किया जाता है। विजयादशमी पर मठ के कपाट खुलने की परंपरा, नागा साधुओं से जुड़ी प्राचीन वस्तुओं की पूजा और कंकाली तालाब का धार्मिक महत्व इस स्थान को रायपुर की विशिष्ट धार्मिक विरासत बनाते हैं।



