रायपुर। राजधानी रायपुर के सड्डू स्थित प्रतिष्ठित प्रयास आवासीय विद्यालय से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जहाँ भविष्य गढ़ा जाना था, वहीं कक्षा 9वीं के 13 साल के मासूम छात्र को ‘तांत्रिक’ का ठप्पा लगाकर स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

पीड़ित परिजनों के मुताबिक उनका बेटा प्रयास योजना के तहत चयनित होकर सड्डू के प्रयास विद्यालय में पढ़ रहा था। आरोप है कि प्राचार्य और अधीक्षक ने बच्चे पर ‘तंत्र विद्या’ जानने का आरोप लगाया और बिना किसी पूर्व नोटिस के हॉस्टल से निकालकर हाथ में ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) थमा दिया। परिजनों का दावा है कि पिता पर दबाव बनाकर जबरन कुछ कागजों पर साइन भी कराए गए। न्याय के लिए परिवार ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में शिकायत दर्ज कराई है।

स्कूल का अजीब तर्क: अंधेरे में बैठता था, आकृतियां बनाता था

वहीं इस मामले में स्कूल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आया है। हॉस्टल अधीक्षक का कहना है कि छात्र के व्यवहार को लेकर काउंसलिंग कराई गई थी। वह अक्सर अंधेरे में बैठा रहता था और कमरे में अजीबोगरीब आकृतियां बनाता था, जिससे हॉस्टल के अन्य बच्चे डर गए थे। इसी वजह से यह फैसला लिया गया।

शिक्षा आयोग ने लिया संज्ञान, कहा – यह अमानवीय है

इस मामले ने तूल पकड़ा तो शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार गौतम ने स्वतः संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि मीडिया के जरिए उन्हें जानकारी मिली है। किसी बच्चे को इस तरह ‘तांत्रिक’ कहना पूरी तरह अमानवीय और गलत है। आयोग जल्द ही पीड़ित बच्चे और उसके परिजनों से मुलाकात कर मामले की सुनवाई करेगा।

परिजनों की मांग: जांच हो और बच्चे को पढ़ने का मौका मिले

परिजन अब सिर्फ एक मांग कर रहे हैं – मामले की निष्पक्ष जांच हो और उनके बेटे को दोबारा पढ़ाई का अवसर मिले। सवाल यह है कि क्या एक 13 साल के बच्चे को इस तरह मानसिक रूप से प्रताड़ित कर भविष्य से खिलवाड़ करना सही है?

क्या किसी को ‘तांत्रिक’ कहने पर सजा हो सकती है?

हां। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 356 (पुरानी IPC 499/500) के तहत बिना सबूत किसी को तांत्रिक या ढोंगी कहकर बदनाम करना मानहानि है। दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। पीड़ित सिविल कोर्ट में हर्जाने का दावा भी कर सकता है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

Q1. प्रयास विद्यालय में क्या मामला सामने आया है?

— रायपुर सड्डू स्थित प्रयास विद्यालय में 9वीं के 13 वर्षीय छात्र को ‘तांत्रिक’ बताकर TC देकर हॉस्टल से बाहर निकालने का आरोप लगा है, परिजनों ने न्याय की गुहार लगाई है।

Q2. परिजनों का क्या आरोप है?

— परिजनों का कहना है कि बिना उचित सूचना के बेटे को निकाल दिया गया, TC थमा दी गई और पिता से दबावपूर्वक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, उन्होंने CM शिकायत सेल में शिकायत की है।

Q3. स्कूल प्रबंधन का क्या कहना है?

— स्कूल का कहना है कि छात्र अंधेरे में बैठता था और कमरे में आकृतियां बनाता था, जिससे अन्य बच्चे डरते थे, इसलिए काउंसलिंग के बाद फैसला लिया गया।

Q4. शिक्षा आयोग ने क्या कहा?

— शिक्षा आयोग अध्यक्ष सुधीर कुमार गौतम ने इसे अमानवीय घटना बताया और कहा कि किसी बच्चे को इस तरह तांत्रिक नहीं कहा जा सकता, आयोग पीड़ित परिवार से मिलकर सुनवाई करेगा।

Q5. किसी को तांत्रिक कहने पर क्या सजा हो सकती है?

— BNS 2023 की धारा 356 के तहत यह मानहानि है, दोषी को 2 साल तक जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, साथ ही सिविल कोर्ट में हर्जाने का दावा भी किया जा सकता है।