Raipur News: ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर लागू नए नियमों का असर अब शहरों में भी दिखाई देने लगेगा। रायपुर नगर निगम कार्यालय में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 और शहर में इनके क्रियान्वयन को लेकर पत्रकार-वार्ता आयोजित की गई। इसमें नियमों के प्रावधानों के साथ नागरिकों, संस्थानों और बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई।
नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में रखना अनिवार्य किया गया है। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वच्छता अपशिष्ट और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग रखने की व्यवस्था शामिल है। इसका उद्देश्य कचरे को संग्रहण के बाद दोबारा अलग करने की जरूरत कम करना और पुनर्चक्रण व वैज्ञानिक प्रसंस्करण को आसान बनाना है।
रायपुर में वैज्ञानिक व्यवस्था बनाने पर जोर
रायपुर नगर निगम आयुक्त समित मिश्रा ने पत्रकार-वार्ता में नए नियमों और शहर में इनके प्रभावी क्रियान्वयन की कार्ययोजना की जानकारी दी। नई व्यवस्था का लक्ष्य केवल घरों और संस्थानों से कचरा उठाना नहीं, बल्कि कचरे के स्रोत से लेकर संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और अंतिम वैज्ञानिक निपटान तक पूरी श्रृंखला को व्यवस्थित करना है।

अब सिर्फ निगम की जिम्मेदारी नहीं
नई व्यवस्था का सीधा असर आम नागरिकों पर भी पड़ेगा। कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगी। घरों और संस्थानों को कचरा निकलते समय ही उसका पृथक्करण करना होगा। निर्धारित श्रेणी के अनुसार कचरा देने से संग्रहण, छंटाई और प्रसंस्करण की पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
बड़े कचरा उत्पादकों पर भी शिकंजा
नए नियमों में थोक कचरा उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की गई हैं। 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे ज्यादा ठोस कचरा पैदा करने वाली संस्थाएं इस श्रेणी में आएंगी। बड़े आवासीय परिसरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
ऑनलाइन होगी मॉनिटरिंग
नए नियमों में कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी पर भी जोर दिया गया है। कचरा पैदा होने से लेकर उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान तक की गतिविधियों को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि कचरा किस स्तर पर और किस प्रक्रिया से गुजर रहा है।
नियम तोड़े तो देना पड़ सकता है मुआवजा
नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान किया गया है। बिना पंजीकरण संचालन, गलत रिपोर्टिंग, जाली दस्तावेज या निर्धारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था का पालन नहीं करने जैसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है। प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाए जाने की व्यवस्था की गई है।
MRF से कचरे की छंटाई
रायपुर में सूखे कचरे की छंटाई और उपयोगी सामग्री की रिकवरी में एमआरएफ यानी सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों की भूमिका अहम होगी। स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी कचरा संग्रहण, पृथक्करण और परिवहन से जुड़ी होगी, जबकि एमआरएफ में सूखे कचरे की छंटाई कर पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग किया जा सकेगा।
लैंडफिल में कम जाएगा कचरा
नई व्यवस्था का एक प्रमुख लक्ष्य लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा घटाना है। प्रावधानों के अनुसार केवल गैर-पुनर्चक्रणीय, गैर-ऊर्जा-पुनर्प्राप्ति योग्य और अक्रिय कचरे को ही लैंडफिल में भेजने पर जोर है। यदि घर और संस्थान स्तर पर कचरा सही तरीके से अलग किया जाता है, तो बड़ी मात्रा में सामग्री पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण के लिए भेजी जा सकती है।



