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Stray Cattle Attack: रायपुर में सांड के हमले से बुजुर्ग और 11 महीने के बच्चे समेत 15 लोग घायल, नगर निगम को घेरा

Stray Cattle Attack: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आवारा मवेशियों का आतंक दिनों-दिन इस कदर बढ़ता जा रहा है कि आम जनता का सड़क पर चलना तक दूभर हो गया है। मुख्य मार्ग हों या घनी आबादी वाले गली-मोहल्ले, हर जगह सड़कों पर बैठे आवारा पशु कभी भी भीषण सड़क दुर्घटनाओं या जानलेवा हमलों का […]

दीनदयाल उपाध्याय नगर क्षेत्र में सांड के अचानक किए गए हमले में कई लोग घायल हुए
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Stray Cattle Attack: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आवारा मवेशियों का आतंक दिनों-दिन इस कदर बढ़ता जा रहा है कि आम जनता का सड़क पर चलना तक दूभर हो गया है। मुख्य मार्ग हों या घनी आबादी वाले गली-मोहल्ले, हर जगह सड़कों पर बैठे आवारा पशु कभी भी भीषण सड़क दुर्घटनाओं या जानलेवा हमलों का कारण बन रहे हैं।

प्रशासन और नगर निगम की उदासीनता के कारण शहर की जनता रोजाना अपनी जान हथेली पर लेकर सफर करने को मजबूर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं।

दीनदयाल उपाध्याय नगर में दिल दहला देने वाली घटना

हाल ही में दीनदयाल उपाध्याय नगर क्षेत्र में आवारा पशुओं के आतंक का एक और भयावह मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। यहां एक अनियंत्रित सांड ने एक बुजुर्ग व्यक्ति बी.एन. शर्मा और उनके महज 11 महीने के मासूम नाती को बुरी तरह से जख्मी कर दिया। इस एक ही घटना में सांड के हमले से लगभग 15 लोग घायल हो गए, जिनमें एक गर्भवती महिला और पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष कल्पना पटेल भी शामिल हैं, जिन्हें गंभीर हालत में बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

जनप्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी पर तीखा हमला

इस दर्दनाक घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि रायपुर में सांसद, विधायक, महापौर और पार्षद सभी भारतीय जनता पार्टी के हैं, लेकिन जनता की सुधि लेने वाला कोई भी नुमाइंदा मौके पर नजर नहीं आया। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि बीजेपी के इस राज में आम नागरिकों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है और जनता भगवान भरोसे जीने को मजबूर है।

कागजी अभियानों और फोटोबाज़ी तक सीमित व्यवस्था

विकास उपाध्याय ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कागजों पर बड़े-बड़े अभियान चलाने और मीडिया के लिए फोटो खिंचवाने से जनता की जान नहीं बचाई जा सकती। यदि जमीनी स्तर पर वास्तव में कोई व्यवस्था सक्रिय होती, तो आज शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का इस तरह तांता नहीं लगा होता। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि अब तक कितने मवेशियों को हटाया गया है और इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

पूर्व सरकार के गौठानों को बंद करने का लगाया आरोप

पूर्व विधायक ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गांवों और शहरों में ‘गौठान’ इसीलिए बनाए गए थे ताकि गौमाता और अन्य मवेशियों को सुरक्षित आश्रय, नियमित आहार और समय पर चिकित्सा मिल सके। लेकिन वर्तमान बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही उन गौठानों को बंद कर दिया, जिसका नतीजा यह है कि मवेशी एक बार फिर सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं और सरकार ने इसके जरिए आम जनता की जान को सीधे तौर पर दांव पर लगा दिया है।

घायलों के लिए उचित मुआवजे और मुफ्त इलाज की मांग

जनता की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए विकास उपाध्याय ने बीजेपी सरकार और रायपुर नगर निगम से स्पष्ट मांग की है कि दीनदयाल उपाध्याय नगर की इस घटना में जितने भी लोग घायल हुए हैं, उन सभी को सरकार तुरंत उचित मुआवजा दे। इसके साथ ही, अस्पताल में भर्ती सभी घायलों (विशेषकर बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिला) का संपूर्ण इलाज पूरी तरह से मुफ्त किया जाए ताकि पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके।

नगर निगम को चेतावनी और अल्टीमेटम

विकास उपाध्याय ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर निगम को तत्काल प्रभाव से एक विशेष अभियान चलाकर शहर की सड़कों को आवारा पशुओं से पूरी तरह मुक्त करना चाहिए। साथ ही, भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए एक स्थाई और फूल-प्रूफ व्यवस्था लागू की जानी चाहिए ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह के दर्द से न गुजरना पड़े।

आंदोलन की चेतावनी और निष्कर्ष

अंत में उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अब भी गहरी नींद से नहीं जागे, तो आम जनता की सुरक्षा के इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों तक जोरदार आंदोलन किया जाएगा। प्रशासन को यह समझना होगा कि यह केवल प्रशासनिक अव्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील सवाल है।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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