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कांग्रेस की अधूरी योजना को बदलाव के साथ आगे बढ़ाएगी साय सरकार, राम वनगमन पथ पर अब क्या होगा खास?

Chhattisgarh Ram Van Gaman Path: छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के विकास की योजना को साय सरकार नए सिरे से आगे बढ़ाने जा रही है। राज्य के 31 ऐसे स्थलों को विकसित करने की तैयारी है, जिन्हें भगवान श्रीराम के वनवास मार्ग से जुड़ा माना जाता है। यहां साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए […]

Ram Van Gaman Path development plan in Chhattisgarh with proposed facilities for devotees
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Chhattisgarh Ram Van Gaman Path: छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के विकास की योजना को साय सरकार नए सिरे से आगे बढ़ाने जा रही है। राज्य के 31 ऐसे स्थलों को विकसित करने की तैयारी है, जिन्हें भगवान श्रीराम के वनवास मार्ग से जुड़ा माना जाता है।

यहां साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आश्रय स्थल, सत्संग भवन और भोजन के लिए सीता रसोई बनाई जाएगी। पर्यटन विभाग ने पहले चरण के 10 स्थलों का सर्वे पूरा कर लिया है। पूरी योजना के लिए 62 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है।

तीन चरणों में विकसित होंगे 31 स्थल

राम वनगमन पथ के विकास की योजना को तीन वित्त वर्षों में पूरा करने की तैयारी है। पहले चरण में 2026-27 के दौरान 10 स्थलों पर काम होगा। दूसरे चरण में 2027-28 में 11 और तीसरे चरण में 2028-29 में 10 स्थलों को विकसित किया जाएगा।

योजना के तहत उत्तर से दक्षिण छत्तीसगढ़ तक वनवास मार्ग से जुड़े माने जाने वाले पड़ावों को शामिल किया गया है। पर्यटन विभाग ने पहले चरण के स्थलों का सर्वे करा लिया है। योजना की तय समयसीमा के मुताबिक, 2028-29 तक सभी 31 स्थलों के विकास का लक्ष्य है।

कांग्रेस सरकार ने 2019-20 में की थी शुरुआत

छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पर्यटन परिपथ की घोषणा कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2019-20 में की थी। उस समय इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु के शोध के आधार पर 75 स्थलों की सूची सामने आई थी। इनमें से नौ स्थलों को विकास के लिए चुना गया था।

कांग्रेस शासन के दौरान चंदखुरी के कौशल्या मंदिर और शिवरीनारायण सहित कुछ प्रमुख स्थलों पर विकास कार्य हुए। हालांकि, बाकी स्थलों पर योजना का अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका। अब साय सरकार ने 31 स्थलों को शामिल करते हुए इस योजना को नए सिरे से आगे बढ़ाने की तैयारी की है।

सीतामढ़ी-हरचौका से इंजरम तक राम वनगमन पथ

मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने उत्तर में सीतामढ़ी-हरचौका के मवई क्षेत्र से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। इसके बाद वे दक्षिण की ओर सुकमा में शबरी नदी के किनारे आगे बढ़े थे। छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल भी माना जाता है। इसी वजह से यहां उन्हें भांजा राम कहा जाता है।

नई योजना में सरगुजा से बस्तर तक अलग-अलग क्षेत्रों के स्थलों को शामिल किया गया है। इनका चयन दो शोध ग्रंथों में दर्ज अध्ययन के आधार पर किया गया है।

सरगुजा संभाग के इन स्थलों का होगा विकास

सरगुजा संभाग में सीतामढ़ी छतोड़ा, सीतामढ़ी-रापा, सीतामढ़ी कनवाई, ओड़गी की सीता लेखनी, मरहट्टा का राम-लक्ष्मण पायन, सारासोर का सीताकुंड और सूरजपुर का राम मंदिर शामिल हैं।

बस्तर संभाग में इन जगहों पर काम

बस्तर संभाग में छोटे डोंगर, कोटुमसर-कोटि महेश्वर, तीरथगढ़ का सीता कुंड, नारायणपुर की रक्सा डोंगरी और कोंटा के पास इंजरम को योजना में शामिल किया गया है।

मध्य छत्तीसगढ़ के स्थलों पर भी फोकस

मध्य छत्तीसगढ़ में महानदी से जुड़े कई स्थलों को विकसित करने की योजना है। इनमें रुद्री का रुद्रेश्वर महादेव, सिहावा का श्रृंगी ऋषि आश्रम, राजिम का लोमश ऋषि आश्रम, पैसर घाट, खिंगेश्वर का मांडव्य आश्रम, आरंग का बागेश्वर शिव मंदिर, तुरतुरिया का वाल्मीकि आश्रम और सिरपुर शामिल हैं।

रामगढ़ और रामाराम में क्या नया होगा?

योजना के तहत उन स्थलों पर भी नए काम किए जाएंगे, जहां पहले विकास हो चुका है। रामगढ़ और रामाराम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

रामगढ़: यहां कांग्रेस सरकार ने सीता बेंगरा गुफा के पास छह कॉटेज, कैफेटेरिया, दो डॉरमेट्री, भगवान राम की मूर्ति और दीप स्तंभ बनवाए थे। अब पहाड़ी की चोटी और प्राचीन सीताकुंड को विकसित करने की योजना है। मान्यता है कि भगवान राम ने यहां अपने केश धोए थे और इस स्थान की मिट्टी चंदन जैसी है।

रामाराम: यहां पहले रॉक गार्डन, कृत्रिम गुफा और पर्यटन सूचना केंद्र बनाया गया था। गुफा में भगवान राम के जन्म से लेकर वनवास और राज्याभिषेक तक की कथा प्रदर्शित की गई है। अब पहाड़ी पर स्थित भगवान राम के चरण स्थल को विकसित करने की योजना है।

दो शोध ग्रंथों के आधार पर हुआ स्थलों का चयन

राम वनगमन पथ के स्थलों की पहचान के लिए दो शोधकर्ताओं के अध्ययन को आधार बनाया गया है। पहला शोध छत्तीसगढ़ के इतिहासकार स्वर्गीय हेमू यदु का है। उनका अध्ययन वर्ष 2018 में प्रकाशित पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ’ में संकलित है। दूसरा शोध पं. राम अवतार शर्मा का है। उन्होंने अयोध्या से श्रीलंका तक भगवान राम के वनगमन मार्ग का अध्ययन किया था। उनके शोध में देशभर के 240 से अधिक स्थलों का उल्लेख है।

साधु-संतों के ठहरने से लेकर भोजन तक की व्यवस्था

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के मुताबिक, राम वनगमन पर्यटन परिपथ योजना को आगे बढ़ाते हुए 31 स्थलों के विकास का संकल्प लिया गया है। इस बार साधु-संतों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन स्थलों पर आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई बनाई जाएगी। इससे साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने तथा भोजन की व्यवस्था हो सकेगी। स्थानीय लोगों को भी सत्संग का लाभ मिलेगा। जहां जरूरत होगी, वहां भगवान राम की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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