रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे के दूसरे दिन सोमवार को बैठकों का दौर खत्म हुआ। इस दौरान विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के साथ संगठनात्मक बैठक हुई। इससे पहले, रविवार को पहले दिन करीब 9 घंटे तक संगठन के अलग-अलग स्तर के नेताओं के साथ बैठकें की गईं। इन बैठकों में साल 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी, संगठन की मजबूती और सरकार व संगठन के बीच तालमेल पर चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, स्मृति ईरानी सरकार और संगठन की रिपोर्ट तथा कामकाज का ब्योरा लेकर बैठकों में शामिल हुई थीं। बैठक के बाद कई मंत्रियों के चेहरे उतरे हुए नजर आए। इसी बीच, आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन अन्य मंत्रियों के बाहर आने से करीब एक घंटे पहले ही कार्यालय से रवाना हो गए।
जिसके ऊपर दायित्व होगा, थोड़ी शिकायत तो होगी ही: मंत्री राजेश अग्रवाल
मंत्रियों को लेकर कार्यकर्ताओं की शिकायतें सामने आने की बात पर मीडिया के सवालों से कृषि मंत्री रामविचार नेताम बचते नजर आए और उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। वहीं, मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा, जिसके ऊपर दायित्व होगा, थोड़ी शिकायत तो होगी ही। हालांकि, शिकायतें किन मुद्दों पर थीं और किन मंत्रियों से जुड़ी थीं, इसका पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
मंत्रियों को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें सांसदों और निगम-मंडल के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठकों में सामने आईं। बताया गया है कि संगठन से मिली इन शिकायतों के बाद उन्होंने सभी नेताओं को एकजुट होकर पार्टी के लिए काम करने और संगठन की सक्रियता बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए।
प्रदेश प्रभारी की दो टूक: दूरियां मिटाएं
बैठक में प्रदेश प्रभारी ने मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिया है कि वे दिवाली के समय अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में भोज आयोजित करें। इस आयोजन में कार्यकर्ताओं और जनता दोनों को शामिल किया जाएगा, ताकि उनके बीच की दूरियां मिटाई जा सकें।
बैठक के दौरान स्मृति ईरानी ने सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने और जनता के बीच पार्टी की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संगठन के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने तथा सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाकर काम करने की बात कही।
कुल मिलाकर, स्मृति ईरानी का यह दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा भले ही चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए था, लेकिन इन दो दिनों में ‘ऑल इज वेल’ के दावों के बजाय शिकवे-शिकायतों और पार्टी की अंदरूनी कलह का दौर ज्यादा सुर्खियों में रहा।



