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Messing with Faith : बताशे बनाने वालों की खुली पोल! गंदगी में बन रहा है दीपावली का प्रसाद, चप्पल पहनकर गिराई जा रही थी चाशनी…

Messing with Faith : बताशे बनाने वालों की खुली पोल! गंदगी में बन रहा है दीपावली का प्रसाद, चप्पल पहनकर गिराई जा रही थी चाशनी…
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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Messing with Faith : दीपावली जैसे पावन पर्व पर जहां घर-घर में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, वहीं पूजा में चढ़ाए जाने वाले खील-बताशे की शुद्धता और सफाई पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दरअसल, खाद्य विभाग की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि बिलासपुर के कई इलाकों में बताशों का निर्माण बेहद गंदे हालातों में किया जा रहा है।

चप्पल पहनकर बनाया जा रहा है प्रसाद

शहर के शनिचरी बाजार, गोलबाजार और अन्य इलाकों में जिन जगहों पर बताशे बनाए जा रहे हैं, वहां न तो कोई उचित साफ-सफाई है और न ही खाद्य सामग्री को ढक कर रखने की व्यवस्था। मजदूर उसी गंदगी भरी जगह पर चप्पल पहनकर चाशनी गिराते हुए नजर आए। जिस टिन की शीट पर बताशे की टिक्की तैयार हो रही है, उस पर चाशनी के साथ-साथ मिट्टी और धूल भी जम चुकी है।

चाशनी पर झूमती नज़र आई मक्खियां

जिन जगहों पर बताशे बनाए जा रहे हैं, वहां शक्कर की मिठास के कारण मक्खियों की भरमार देखी गई। मक्खियां पहले गोबर पर बैठती हैं और फिर वहीं से उड़कर चाशनी और बताशों पर बैठ रही हैं। इससे न केवल प्रसाद की शुद्धता पर प्रश्नचिन्ह लगता है, बल्कि ये स्वास्थ्यगत दृष्टिकोण से भी खतरे का संकेत है।

सड़क किनारे गंदगी के बीच हो रहा निर्माण

कई स्थानों पर तो घरों के बाहर सड़क किनारे ही बताशे बनाए जा रहे हैं। वहीं सड़क पर गोबर और अन्य गंदगी फैली हुई है। ऐसे में वहां बैठकर बताशे बनाना न केवल परंपरा के साथ मजाक है, बल्कि लोगों की श्रद्धा के साथ भी खिलवाड़ है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि दीपावली पर खील-बताशे का विशेष महत्व होता है। खील जहां चावल से बनी लक्ष्मीप्रिय धान्य सामग्री है, वहीं बताशे प्रेम और सुख का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें देवी लक्ष्मी को भोग लगाकर सुख, समृद्धि और वैभव की कामना की जाती है। लेकिन जिस प्रकार से इनका निर्माण हो रहा है, उसे देख श्रद्धालु भी अब इन्हें प्रसाद के रूप में चढ़ाने से कतराने लगे हैं।

मामले में कार्रवाई की उठी मांग

शहरवासियों का कहना है कि इस पावन पर्व पर जो सामग्री देवी को अर्पित की जाती है, वह शुद्ध और साफ-सुथरी होनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे निर्माण स्थलों का निरीक्षण करे और ऐसे गंदगी में बनाए जा रहे खाद्य पदार्थों पर रोक लगाए।

खील-बताशा सिर्फ परंपरा नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है। लेकिन जिस तरह इन्हें गंदगी में तैयार किया जा रहा है, वह न केवल त्योहार की पवित्रता को आहत करता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी घातक साबित हो सकता है।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

संभागीय प्रमुख व वरिष्ठ संवाददाता

बस्तर व सरगुजा अंचल के दूरस्थ क्षेत्रों से जनमुद्दों और जनसमस्याओं पर बेबाक रिपोर्टिंग।

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