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आदिवासियों के विरोध के आगे झुका सिस्टम! पेल्मा जनसुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित…

आदिवासियों के विरोध के आगे झुका सिस्टम! पेल्मा जनसुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित…
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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रायगढ़। गारे पेल्मा कोल ब्लॉक (SECL-ADANI) को लेकर 19 मई को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को भारी विरोध और कानूनी आपत्तियों के बीच प्रशासन ने अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। तमनार ब्लॉक के लालपुर समेत प्रभावित गांवों के ग्रामीणों और आदिवासियों के लगातार विरोध के बाद यह बड़ा फैसला सामने आया है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB), नवा रायपुर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रायगढ़ के अनुरोध पर 19 मई को ग्राम पेल्मा के अटल चौक में आयोजित होने वाली लोक सुनवाई आगामी आदेश तक स्थगित की जाती है।

दरअसल, जनसुनवाई से ठीक पहले लालपुर गांव के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अडानी फाउंडेशन द्वारा कथित तौर पर बांटे गए टी-शर्ट, क्रिकेट किट, साड़ियां और स्टील पेटियां वापस कर दीं। ग्रामीणों का आरोप था कि यह सामान जनसुनवाई के समर्थन के लिए “प्रलोभन” के रूप में बांटा गया था।

सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन में 70 से अधिक हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक “2 एकड़ जमीन के बदले 1 पक्की नौकरी” और समान मुआवजे की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे परियोजना और जनसुनवाई का लोकतांत्रिक विरोध जारी रखेंगे।

गौरतलब है कि प्रभावित 9 गांवों में से 8 गांव पहले से ही जनसुनवाई का विरोध कर रहे थे। ऐसे में कलेक्ट्रेट परिसर में सार्वजनिक रूप से सामान लौटाए जाने और लिखित शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासन के लिए जनसुनवाई की निष्पक्षता साबित करना मुश्किल हो गया था। कानूनी विवाद की आशंका को देखते हुए आखिरकार प्रशासन को कदम पीछे खींचना पड़ा।

ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला साबित करता है कि संगठित जनआंदोलन और कानूनी जागरूकता के जरिए आम लोग भी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

छत्तीसगढ़ राज्य ब्यूरो एवं क्राइम रिपोर्टर

छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था, पुलिस-प्रशासन और जनहित के प्रमुख मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्टिंग।

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