Wildlife Week 2026: वन्यजीवों की सुरक्षा की असल शुरुआत हमेशा उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा से ही होती है। इसी मुख्य उद्देश्य और विचार के साथ कलिंगा विश्वविद्यालय में वन्यजीव सप्ताह 2026 के उद्घाटन समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
इस वर्ष की विशेष थीम “जुड़े आवास, समृद्ध वन्यजीवन” ने यहाँ उपस्थित सभी विद्यार्थियों को स्वस्थ प्राकृतिक आवासों, जैव विविधता और मानव कल्याण के बीच के गहरे संबंधों को गहराई से समझने के लिए प्रेरित किया।
वन विभाग और विश्वविद्यालयों का अनूठा सहयोगात्मक आयोजन
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के रायपुर वन मंडल द्वारा कलिंगा विश्वविद्यालय के ग्रीन क्लब और प्राणीशास्त्र विभाग के विशेष सहयोग से किया गया। इस आयोजन में विभिन्न पाँच शासकीय विद्यालयों और तीन महाविद्यालयों से कुल 160 उत्साही विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। वन अधिकारियों और शिक्षकों के योग्य मार्गदर्शन में बच्चों ने संरक्षण के महत्व को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों रूपों में समझा।

प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क का महत्व
इस साल की थीम इस बात पर जोर देती है कि प्राकृतिक आवासों के बीच आपस में संपर्क बना रहना कितना जरूरी है। वन, आर्द्रभूमियाँ और अन्य हरित क्षेत्र वन्यजीवों को भोजन, रहने के लिए आश्रय और प्रजनन स्थल प्रदान करते हैं। वहीं, वन्यजीव गलियारे (कॉरीडोर) उन्हें एक आवास से दूसरे आवास तक सुरक्षित आने-जाने का मार्ग देते हैं। जीवों के अस्तित्व और समृद्धि के लिए इन संपर्कों की रक्षा करना बेहद आवश्यक है।
संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण पर प्रकाश
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उपमंडल अधिकारी तरुण तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने मुख्य संबोधन में उन्होंने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के जरूरी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के उदाहरण देते हुए मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व से जुड़े रोचक प्रसंग साझा किए और युवाओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने को कहा।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का प्रसार
उद्घाटन सत्र के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री और शासन की प्रेरणा से चल रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का संदेश भी उपस्थित लोगों तक पहुंचाया। अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपनी माताओं के सम्मान में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं और उसकी उचित देखभाल करें, ताकि पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने में हर नागरिक अपना योगदान दे सके।

पर्यावरण संरक्षण में भाग लेने प्रेरित किया
कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता होना ही काफी नहीं है, बल्कि इसके साथ हमारा जिम्मेदार व्यवहार और प्रकृति की सुरक्षा के लिए किए गए ठोस प्रयास ही भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं। युवाओं की ऊर्जा ही पर्यावरण बचाने की दिशा में सबसे बड़ी ताकत है।
कार्यशालाओं में ओरिगामी और सीड बॉल का व्यावहारिक प्रशिक्षण
उद्घाटन सत्र के बाद छात्रों के लिए कई रचनात्मक कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें ओरिगामी (कागज की कला), पक्षियों के घोंसले बनाना और बीज गोलियाँ (सीड बॉल) तैयार करना शामिल था। ओरिगामी में छात्रों ने तितलियाँ और मेंढक बनाए, तो वहीं घोंसला निर्माण कार्यशाला में प्राकृतिक सामग्रियों से पक्षियों के लिए तीन प्रकार के घोंसले तैयार किए गए। इसके अलावा वनीकरण के लिए सीड बॉल बनाने की ट्रेनिंग भी दी गई।
संरक्षण के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का संकल्प
इन सभी व्यावहारिक गतिविधियों और सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण को सीधे तौर पर हरित क्षेत्रों की सुरक्षा और पुनर्स्थापना से जोड़कर देखा। इस पूरे आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि एक समृद्ध वन्यजीवन के लिए स्वस्थ और आपस में जुड़े प्राकृतिक आवासों का होना अनिवार्य है। कार्यक्रम के अंत में युवाओं ने प्रकृति की देखभाल करने और संरक्षण के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का संकल्प लिया।



