Crackdown on Khair Smuggling Syndicate: खैर लकड़ी की अवैध तस्करी के मामले में महासमुंद पुलिस पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के सिंडीकेट ने पिछले दो वर्षों के दौरान ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की कथित तौर पर तस्करी की। अवैध कारोबार को कागजों में वैध दिखाने के लिए फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाते थे और इसके लिए आठ शेल कंपनियों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है।
खैर लकड़ी के 23,350 किलो अवैध परिवहन के मामले में पिथौरा थाने में अपराध क्र. 172/2026 दर्ज हुआ था — BNS धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5), 111, आर्म्स एक्ट 25 और वन अधिनियम 1927 की धारा 42(1), 41(2)(ख)(घ), 52(1) के तहत। वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा ने NTPS NOC में कूटरचना कर राजस्व क्षति का आवेदन दिया था।
तकनीक से खुला 120 करोड़ का खेल
विवेचना में पुलिस ने 7 सितंबर को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने पर छापा मारकर 81 लाख रुपये नगद जब्त किए थे। तकनीकी जांच में सामने आया कि सिंडिकेट ने 2 साल में ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ से अधिक की खैर तस्करी की। कागजों में वैध दिखाने के लिए 8 शेल कंपनियों से फेक इनवॉयस बनाते थे, लेनदेन और लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल अकाउंट भी मिले।
फेक इनवॉयस सप्लायर गिरफ्तार
इस मामले में महासमुंद पुलिस ने फर्जी कंपनियों का संचालन करने और तस्करी के नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों पीयूष और सिंघल इंटरप्राइजेज के संचालक को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश के साथ-साथ पूरे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
महासमुंद पुलिस ने ओडिशा से नेटवर्क को फेक इनवॉयस देने वाले इन दो को आरोपियों को गिरफ्तार किया:
- पारितोष मिश्रा (47), पिता सुरेंद्र मिश्रा- पीयूष इंटरप्राइजेज संचालक, पता क्र.4 प्लॉट 373 रफाजाल सालेभाटा बोलांगीर, ओडिशा
- अखिलेश सिंघल (52), पिता स्व. चंद्रप्रकाश सिंघल- सिंघल इंटरप्राइजेज संबलपुर, निवासी फार्म रोड दिल्ली शॉ मिल के पास बड़ा बाजार दुर्गा मंदिर संबलपुर, थाना संबलपुर, जिला संबलपुर, ओडिशा
पुलिस, वन विभाग और वित्तीय एजेंसियों के समन्वय से अवैध संपत्ति कुर्की-राजसात की प्रक्रिया शुरू हो गई है, अन्य आरोपियों की तलाश और वित्तीय ट्रेल की जांच जारी है।
जानिए किस काम में आती है खैर की लकड़ी
खैर (Acacia catechu) एक महत्वपूर्ण वृक्ष है, जो मुख्य रूप से भारत, नेपाल, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के अन्य भागों में पाया जाता है। यह वृक्ष अपनी कठोर लकड़ी और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। खैर की लकड़ी से कई उपयोगी उत्पाद बनाते हैं, जिनमें कत्था (Catechu) और काठी (Cutch) प्रमुख हैं। कत्था का उपयोग मुख्य रूप से पान, औषधियों, रंग निर्माण, चमड़ा उद्योग और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।
खैर की लकड़ी के प्रमुख उपयोग:
कत्था उत्पादन – पान में स्वाद और रंग देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
औषधीय उपयोग – यह कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है, जैसे कि संक्रमण रोकने और घाव भरने में सहायक।गुणवत्तापूर्ण प्लायवुड लें
रंग बनाने में – चमड़ा उद्योग और वस्त्र उद्योग में इसका उपयोग प्राकृतिक रंग के रूप में होता है।
फर्नीचर और निर्माण कार्य – इसकी लकड़ी मजबूत होती है, इसलिए इसका उपयोग फर्नीचर, रेल की पटरी के स्लीपर, और भवन निर्माण में किया जाता है।
ईंधन– इसकी लकड़ी जलाने के लिए भी उपयोग की जाती है क्योंकि यह उच्च तापमान उत्पन्न करती है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. महासमुंद में खैर तस्करी का मामला क्या है?
पिथौरा थाना में 23,350 किलो खैर लकड़ी के अवैध परिवहन और NTPS NOC में कूटरचना का केस दर्ज हुआ था, जांच में यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट निकला।
Q2. कितने करोड़ के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ?
पुलिस की तकनीकी जांच में 2 साल में ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक की खैर लकड़ी तस्करी के प्रमाण मिले हैं।
Q3. तस्करी को वैध कैसे दिखाया जाता था?
8 शेल कंपनियों के जरिए फेक इनवॉयस तैयार किए जाते थे और 10 से ज्यादा म्यूल बैंक अकाउंट से लेनदेन और लेयरिंग की जाती थी।
Q4. मुख्य आरोपी कौन है और कितनी रकम जब्त हुई?
मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल है, 7 सितंबर 2026 को उसके ठिकाने से 81 लाख रुपये जब्त किए गए।
Q5. फेक इनवॉयस के आरोप में किन्हें गिरफ्तार किया गया?
पारितोष मिश्रा (पीयूष इंटरप्राइजेज, बोलांगीर, ओडिशा) और अखिलेश सिंघल (सिंघल इंटरप्राइजेज, संबलपुर, ओडिशा) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।



