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गौठान और गोधन न्याय योजना ग्रामीणों की अपनी योजना, इसकी पूरे देश में चर्चा: बघेल

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Gothan and Godhan Nyaya Yojana, their plan of villagers, its discussion all over the country: Baghel

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में की तैयारियों की समीक्षा
हरेली पर गौठानों में समारोह पूर्वक होगी ’गोधन न्याय योजना’ की शुरूआत
चरणबद्ध रूप से सभी ग्राम पंचायतों-गांवों में बनेंगे गौठान

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस कहा है कि गोधन न्याय योजना के संचालन और निगरानी की पूरी जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों की है। इस योजना की पूरे देश में चर्चा है, पूरे देश के अर्थशास्त्रियों और सामाजिक संगठनों की निगाह इस योजना पर है। इस योजना से गोबर एक कीमती वस्तु बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले से संचालित समर्थन मूल्य में धान खरीदी, लघु वनोपजों की खरीदी और तेंदूपत्ता संग्रहण का काम जिस कुशलता और व्यवस्थित ढंग से किया जा रहा है। आने वाले समय में ऐसी ही व्यवस्था गोबर खरीदी और इससे तैयार वर्मी कम्पोस्ट की मार्केटिंग की करनी होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठान छत्तीसगढ़ की परंपरा का हिस्सा है, जिन्हें आधुनिक स्वरूप देकर व्यावसायिकता से जोड़ा जा रहा है। जिससे गौठानों के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सके और उन्हें आय का जरिया मिल सके। उन्होंने कहा कि गौठान और गोधन न्याय योजना मूलरूप से ग्रामीणों की अपनी योजना है। इस योजना को प्रारंभ करने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही है। आने वाले समय में ग्रामीण स्वयं इन योजनाओं का संचालन करेंगे।

बघेल ने कहा कि 20 जुलाई हरेली पर्व से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना की प्रदेशव्यापी शुरूआत होगी। प्रथम चरण में ग्रामीण क्षेत्रों के 2408 और शहरी क्षेत्रों के 377 गौठानों में गोबर की खरीदी प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सभी गांवों में गोधन न्याय योजना प्रारंभ करने की मांग आएगी। इसलिए चरणबद्व रूप से सभी 11 हजार 630 ग्राम पंचायतों और फिर 20 हजार गांवों में गौठान तैयार करने होंगे। इसके लिए भी कलेक्टर भूमि के चिन्हांकन का काम प्रारंभ कर दें। उन्होंने स्व-सहायता समूहों के प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों को कृषि विभाग, वेटनरी, कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाए।


बघेल ने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के गौठानों में बड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होगा, हालांकि इसके सबसे बड़े ग्राहक गांव के किसान ही होंगे। इसके साथ ही वन, कृषि, उद्यानिकी, नगरीय विकास विभाग सहित अन्य विभाग जिन्हें वर्मी कम्पोस्ट की आवश्यकता होती है, वे प्राथमिकता के आधार पर गौठान में तैयार वर्मी कम्पोस्ट सहकारिता के माध्यम से खरीदें।

कामधेनु विश्वविद्यालय में होगा शोध

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्ग में दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन के साथ जैविक खाद, गौ-मूत्र से औषधि तैयार करने और जैविक पेस्टिसाइट तैयार करने पर अनुसंधान कार्य किए जाएं।

इस अवसर पर कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे, मुख्य सचिव आर पी मंडल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, खाद्य विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह, सहकारिता सचिव आर प्रसन्ना, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, नगरीय विकास सचिव श्रीमती अलरमेल मंगई डी., राजस्व सचिव रीता शांडिल्य, मुख्यमंत्री के ग्रामीण विकास सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, मुख्यमंत्री सचिवालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया उपस्थित थीं।