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जंस्कार नदी पर बने पुल का लोकार्पण, करगिल से लेह की दूरी 160 किमी हुई कम, कुछ ही घंटों में पहुंच जाएगी आर्मी

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जंस्कार नदी पर बने पुल का लोकार्पण, करगिल से लेह की दूरी 160 किमी हुई कम, कुछ ही घंटों में पहुंच जाएगी आर्मी

लेह। चीन से गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद हरकत में आई सरकार ने अब एक और बड़ा काम पूरा करा दिया है। लेह की कनेक्टिविटी और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जवानों को पहुंचाने की दिशा में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने लद्दाख में बहने वाली जंस्कार नदी पर पुल बनाने का काम पूरा कर लिया है। इसके साथ ही लेह से कारगिल के जंस्कार की दूरी 160 किलोमीटर कम हो गई है।

बता दें कि हिमाचल क्षेत्र में तीन पुलों का निर्माण होते ही दो दिन का मनाली से लेह का सफर आठ घंटे का रह जाएगा। मनाली से 147 किलोमीटर दूर लेह का दारचा से शुरू हुई यह सड़क सेना के लिए वरदान साबित होगी। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि कुछ ही घंटों में इस इलाके तक पहुंचा जा सकता है। अभी तक ऐसा होता आया है कि सर्दी का मौसम शुरु होते ही इस इलाके में भारी बर्फबारी हो जाती है। इससे लेह पूरी तरह से लगभग छह माह के लिए देश से कट जाता है।

लेह तक पहंचने के लिए सिर्फ हवाई मार्ग ही बच जाता है। जिससे की दुश्मन देश फायदा ले सकते है। क्योंकि लदाख जोन के साथ यहां एक तरफ पाकिस्तान की सीमा लगती है वही दूसरी तरफ चीन की सीमा भी है। लेकिन अब पुल बनने से किसी भी चुनौती से तुरंत निपटा जा सकता है। इसके अलावा करगिल हाइवे पर भारतीय सेना हमेशा पाक के सीधे निशाने पर रहती है। कारगिल के युद्ध में भी सेना को इस मुश्किल का सामना करना पड़ा था।

अब 160 किमी कम हो गई दूरी

इस युद्ध के बाद ही तत्कालीन वाजपेयी सरकार की तरफ से दूसरे मार्ग का प्रस्ताव बनाया गया था। जिसके बाद इस प्रॉजेक्ट पर काम शुरु किया गया था। जंस्कार में बने पुल का उद्घाटन शुक्रवार को किया गया है। यह मार्ग सिर्फ सेना के लिए ही नहीं बल्कि जंस्कार के लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद सावित होगा। छह माह तक कटे रहने चाले लोग अब सीध लेह से जुड़ जाएंगे। पहले उन्हें कारगिल होते हुए लेह पहुंचने में 440 किलोमीटर सफर तय करना पड़ता था। अब यह सफर घटकर 280 किलोमीटर हो गया है।

जोजिला के सूरमा कर्नल शमशेर सिंह के नाम पर बना ब्रिज

बताया गया कि वर्ष 1948 में जोजिला लड़ाई के दौरान कर्नल शमशेर सिंह ने अपने जवानों के साथ पाकिस्तानी की साजिश को नाकाम बना दिया था। उनकी जांबाजी को सलाम करने के लिए ही पुल का नाम शमशेर सिंह रखा गया है। उनकी बहादुरी को आज भी याद किया जाता है। इसलिए इस पुल का नाम उनके नाम पर रखा गया है। ताकि उनकी बहादुरी को सलाम किया जा सके। इस बारे में लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने कहना है कि केंद्र सरकार की तमाम सड़कें सशक्त हो रही हैं, इससे ना सिर्फ लद्दाख का विकास होगा, बल्कि सामरिक स्थितियों को मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी।