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Loan Dispute: 102 करोड़ के लोन विवाद में फंसे दो गुरुद्वारे, जानिए क्या है पूरा मामला

Loan Dispute: कनाडा के ओंटारियो प्रांत में दो प्रमुख गुरुद्वारे भारी-भरकम लोन और कानूनी विवाद की चपेट में आ गए हैं। गुरुद्वारे की प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर लोन लिमिट अब भारी पड़ रही है। दरअसल, सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो और नानकसर ठाठ ईशर दरबार की प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर रखा और […]

Exterior view of a Sikh Gurdwara in Canada under legal and financial dispute scrutiny.
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Loan Dispute: कनाडा के ओंटारियो प्रांत में दो प्रमुख गुरुद्वारे भारी-भरकम लोन और कानूनी विवाद की चपेट में आ गए हैं। गुरुद्वारे की प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर लोन लिमिट अब भारी पड़ रही है।

दरअसल, सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो और नानकसर ठाठ ईशर दरबार की प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी के तौर पर रखा और करीब 102.6 करोड़ रुपये की लोन लिमिट बनाई। ऋणदाता कंपनियों का दावा लगभग 82.1 करोड़ रुपये जारी किएॉ। समय पर किस्तों का भुगतान न होने से इस पर अब तक करीब 88.9 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज चढ़ चुका है।

कोर्ट का संपत्ति की बिक्री और लोन पर रोक का आदेश

इस पूरे मामले में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति को बेचने और उस पर नया कर्ज लेने पर रोक लगा दी है। यह रोक जनवरी में होने वाली अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी। ऋणदाता कंपनियों एसएसएमटी मैनेजमेंट इंक और ऑकुलस मॉर्गेज जीपी इंक ने दोनों गुरुद्वारों, पूर्व लिबरल सांसद व वकील राजविंदर ग्रेवाल और उनकी लॉ फर्म आरएसजी लॉ प्रोफेशनल कॉरपोरेशन के खिलाफ कर्ज वसूली के लिए सिविल मुकदमा दर्ज कराया है।

15 से बढ़कर 24 प्रतिशत हुआ ब्याज

अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, एसएसएमटी ने 25 अप्रैल 2025 को सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो को 1 करोड़ कनाडाई डॉलर का कर्ज दिया था। 20 मई को इसकी सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर कर दी गई। इस लोन पर शुरुआत में 15 प्रतिशत सालाना ब्याज तय हुआ था, जिसे बाद में बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दिया गया। ऋणदाता के मुताबिक, पूरी बकाया राशि पर हर महीने करीब 2.5 करोड़ रुपये का ब्याज बन रहा है।

सिक्योरिटी और ट्रस्ट अकाउंट का विवाद

विवाद का एक मुख्य बिंदु ब्रैम्पटन स्थित नानकसर गुरुद्वारे की संपत्ति है, जिसे लोन की सिक्योरिटी के तौर पर शामिल किया जाना था। ऋणदाता का आरोप है कि आरएसजी लॉ के मालिक दविंदर खटड़ा को इस संपत्ति पर सेकेंड चार्ज दर्ज कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे पूरा नहीं किया गया। ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट के जज फ्रेडरिक एल. मायर्स ने 11 सितंबर को आदेश दिया कि जनवरी की अगली सुनवाई तक ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति न बेची जा सकेगी और न ही उस पर नया लोन लिया जा सकेगा। जांच के दौरान आरएसजी लॉ के ट्रस्ट अकाउंट और गुरुघरों के बीच लाखों डॉलर के लेन-देन का रिकॉर्ड भी सामने आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. कनाडा में कौन से दो गुरुद्वारे लोन विवाद में फंसे हैं?
    सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो और नानकसर ठाठ ईशर दरबार की प्रॉपर्टी इस विवाद में फंसी है।
  2. गुरुद्वारों के नाम पर कुल कितने का लोन लिया गया था?
    प्रॉपर्टी को सिक्योरिटी से जोड़कर 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर यानी करीब 102.6 करोड़ रुपये की लोन लिमिट बनाई गई थी।
  3. लोन पर ब्याज कितना हो चुका है?
    किस्तों का भुगतान न होने के कारण ब्याज बढ़कर 1.3 करोड़ कनाडाई डॉलर यानी करीब 88.9 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
  4. ओंटारियो कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
    कोर्ट के जज ने जनवरी में होने वाली अगली सुनवाई तक ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति को बेचने और उस पर नया लोन लेने पर रोक लगा दी है।
  5. यह मामला किस अदालत में चल रहा है?
    यह मामला ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस में चल रहा है।
Vikas Soni
लेखक / पत्रकार:

Vikas Soni

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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