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No UPI Day: यूपीआई पेमेंट से तौबा! इंदौर में व्यापारियों ने क्यूआर कोड ढके, मर्चेंट सरचार्ज हटाने की मांग

No UPI Day: इंदौर के मध्यक्षेत्र के व्यापारियों ने आज यानी बुधवार को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का फैसला किया है। 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट सरचार्ज के विरोध में शहर के व्यापारी आज सारा कारोबार केवल नगद में करेंगे। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आह्वान पर […]

What is No UPI Day Indore Merchant Surcharge Protest Explained
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

No UPI Day: इंदौर के मध्यक्षेत्र के व्यापारियों ने आज यानी बुधवार को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का फैसला किया है। 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट सरचार्ज के विरोध में शहर के व्यापारी आज सारा कारोबार केवल नगद में करेंगे।

अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आह्वान पर इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन समेत विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है। विरोध दर्ज कराने के लिए व्यापारी अपनी दुकानों के क्यूआर कोड और बारकोड बॉक्स को काले कपड़े से ढंककर रखेंगे।

राजबाड़ा पर जुटे व्यापारी, सामूहिक रूप से ढका बारकोड

अभियान के तहत बुधवार दोपहर राजबाड़ा के पीछे मुख्य बाजार में व्यापारी एकत्र होंगे। वहां वे अपने-अपने यूपीआई बारकोड बॉक्स को सामूहिक रूप से काले कपड़े से ढंककर अपना प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराएंगे। इससे पहले मंगलवार को इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बाजार में घूम-घूमकर दुकानों पर संपर्क किया। उन्होंने व्यापारियों से समर्थन मांगा और ग्राहकों से हाथ जोड़कर एक दिन के लिए ऑनलाइन भुगतान न करने की अपील की।

दुकानों पर लगे पोस्टर, शांतिपूर्ण विरोध की अपील

इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के अनुसार एसोसिएशन से जुड़े सभी व्यावसायिक संस्थानों पर ‘नो यूपीआई डे’ के पोस्टर लगा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि व्यापारियों से अभियान में शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक तरीके से शामिल होने की अपील की गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 2 हजार से ज्यादा के डिजिटल भुगतान पर लगने वाले अतिरिक्त खर्च को लेकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है।

मार्जिन सीमित, अतिरिक्त शुल्क से बढ़ेगी लागत

व्यापारियों का कहना है कि खुदरा कारोबार में मुनाफा यानी मार्जिन पहले से ही काफी सीमित होता है। ऐसे में लेन-देन पर लगने वाली किसी भी अतिरिक्त लागत का सीधा असर उनके व्यापार पर पड़ेगा। इसी वजह से व्यापारिक संगठन सरकार से प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और व्यापारियों के हित में एक स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।

ग्राहकों से सहयोग की मांग, असुविधा देने का इरादा नहीं

व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का उद्देश्य किसी ग्राहक को परेशान या असुविधा में डालना नहीं है। वे केवल प्रस्तावित मर्चेंट सरचार्ज के प्रति अपनी चिंता को शांतिपूर्ण और सामूहिक रूप से शासन के सामने रखना चाहते हैं। इसलिए वे ग्राहकों से भी इस एक दिवसीय अभियान में सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।

कम मार्जिन के बीच अतिरिक्त शुल्क से बढ़ेगी व्यापार की लागत

व्यापारी संगठनों का कहना है कि खुदरा कारोबार में मुनाफा या मार्जिन पहले से ही काफी सीमित होता है। ऐसे में 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त मर्चेंट सरचार्ज लगाने से उनके व्यापार की लागत में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी। लागत बढ़ने का सीधा असर उनके पहले से कम मार्जिन पर पड़ेगा, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों का सर्वाइवल मुश्किल हो जाएगा।

सरकार से स्पष्ट नीति बनाने और पुनर्विचार की मांग

व्यापारियों का मुख्य उद्देश्य इस सांकेतिक अभियान के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है। व्यापारी चाहते हैं कि मर्चेंट सरचार्ज की इस पूरी व्यवस्था पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाए। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान और उससे जुड़े शुल्कों को लेकर व्यापारियों के हितों की रक्षा करने वाली एक स्पष्ट और व्यावहारिक नीति बनाई जाए, ताकि उन पर कोई अनावश्यक वित्तीय दबाव न आए।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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