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निजी स्कूलों के बराबर रोज चलती है मनोज और उज्जवला की ऑनलाइन पाठशाला

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निजी स्कूलों के बराबर रोज चलती है मनोज और उज्जवला की ऑनलाइन पाठशाला

रितुराज पवार/धमतरी। जहां कोरोना काल ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा दिया है, कई देशों की अर्थव्यवस्था औंधे मुंह है। कहने का आशय है कि सन 2020 वास्तव में जिंदा रहने की जुगत का वर्ष है, ऐसे में किसी भी राष्ट्र या दुनिया का भविष्य कहलाने वाले छात्र-छात्राओं का 1 साल पीछे हो जाना पूरी दुनिया का 10 साल पीछे हो जाने के बराबर है।

यही कारण है कि सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई को महत्त्व दिया, निजी स्कूलों के बराबर सरकारी स्कूलों के शिक्षक अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं। इन्हीं में से एक ऐसी शिक्षक दंपति है जिसके मुंह से निवाला तभी उतरता है जब रोजाना वे अपने छात्र छात्राओं से ऑनलाइन कनेक्ट होते हैं। फिलहाल मनोज और उज्जवला की पाठशाला में गणित की परिमेय संख्या और इंग्लिश का टेंस पढ़ाया जा रहा है।

घर पर एंड्रॉयड फोन पर बच्चों की लिस्टिंग

भले ही निजी स्कूलों की चकाचौंध के सामने शासकीय शालाओं की चमक फीकी जान पड़ती है लेकिन, यहां के शिक्षक जिस शिद्दत के साथ अपना कर्तव्य निभाते हैं, वैसा और कहीं देखने को नहीं मिलता। खासकर शिक्षक पंचायत के सभी वर्गों के अधिकांश शिक्षक नए युग के हाईटेक गुरु है। इनकी बदौलत ही सरकार शिक्षा के अधिकार के तहत हंड्रेड परसेंट एजुकेशन की ओर लगातार आगे बढ़ रही है लेकिन, कोरोना कॉल ने शासकीय स्कूलों के बच्चों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर दी। स्कूलों में मध्यम और गरीब तबके के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं जिन घरों में 5 और 10 रुपए का मोबाइल रिचार्ज मायने रखता है, वहां पर एंड्रॉयड फोन और उसका नेट पैक किसी सपने से कम नहीं। ऐसे में सभी छात्र-छात्राओं के घर पर जाना उन्हें घर पर रहने की नसीहत देना, मास्क सैनिटाइजिंग और सुपाच्य व पौष्टिक भोजन से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के नुस्खे बताने के साथ उन बच्चों की लिस्टिंग भी कर लेना, जिनके घर पर एंड्रॉयड फोन है। साथ ही उन बच्चों का भी सर्वे कर लेना जो इस एंड्राइड फोन वाले घर के चारों तरफ कहीं ना कहीं पर रहते हैं। ऐसे बच्चों में आपसी कम्युनिकेशन बनाकर ऑनलाइन पढ़ाना शिक्षक मनोज साहू और उनकी धर्मपत्नी उज्जवला साहू के लिए रोज की बात है।

आॅनलाइन पढ़ाई के लिए खर्च कर दी निजी राशि

अधारी नवागांव में रहने वाली इस दंपत्ति का मुखिया मनोज साहू 2005 में शिक्षाकर्मी के रूप में पदस्थ हुआ और लगातार विभिन्न स्कूलों के माध्यम से अपनी शैक्षणिक क्षमता का परिचय देते हुए फिलहाल स्वर्गीय शिव सिंह वर्मा आदर्श कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में पदस्थ हैं। इसी तरह पिछले 7 सालों से इंग्लिश की टीचर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं उज्जवला साहू। एकलव्य विद्यालय में उन्होंने ऐसी सेवाएं दी कि आज उनकी मूल स्थापना वाली शाला के साथ पूर्व के स्कूल के बच्चे भी ऑनलाइन कनेक्ट हो जाते हैं। यह तब संभव हो पाता है जब यह दंपत्ति लिंक भेज कर सभी बच्चों को रोजाना स्कूल समय पर अध्यापन के लिए तैयार मिलते हैं। यही नहीं इस दंपत्ति ने बकायदा ट्राइपॉड, ब्लूटूथ डिवाइस, श्वेत पटल पर अपनी निजी राशि खर्च कर लगातार बच्चों को पढ़ा रहे हैं और खुद इस बात से संतुष्ट है कि सरकार उन्हें जिस कर्तव्य के लिए मेहनताना देती है उस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश जारी है।

फिलहाल मनोज साहू और उज्जवला साहू की पाठशाला में गणित की परिमेय संख्या और अंग्रेजी का पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर टेंस पढ़ाया जा रहा है। एक तरह से शासकीय शिक्षकों के प्रतीक बनी इस दंपत्ति ने यह भी जाहिर कर दिया कि जिले का शिक्षा विभाग और उनके तमाम नुमाइंदे लगातार लोगों को रीड एंड राइट एट होम के लिए प्रेरित कर रहे हैं ताकि कल को जब स्कूल खुले तो बच्चे निरंतरता की वजह से बड़ी आसानी से स्कूल से जुड़ जाए और देश का सपना सबको शिक्षा, सब हो शिक्षित का सपना पूरा हो।